BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
9 views

भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता और नागरिकता अधिनियम, 1955 के उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार, पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन (Migration) करने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के अर्जन के संबंध में यह व्यवस्था की गई है कि यदि ऐसे व्यक्ति या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी में से कोई भी मूल रूप से भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में पैदा हुआ था, तो वह 19 जुलाई 1948 से पूर्व प्रव्रजन करने पर स्वतः भारत का नागरिक बन जाएगा, बशर्ते उसने अपने प्रव्रजन की तिथि से निर्धारित प्रपत्र में पंजीकरण न कराया हो।
  2. 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो, तथा उसने आवेदन से ठीक पहले कम से कम 12 वर्षों तक भारत में निवास किया हो या केंद्र सरकार की सेवा में रहा हो।
  3. 3. वर्ष 2003 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम द्वारा भारत में 'Overseas Citizen of India' (OCI) कार्डधारक की अवधारणा को शामिल किया गया, और OCI कार्डधारकों को संविधान के अनुच्छेद 16 के अंतर्गत प्रदत्त 'लोक रोजगार के अवसरों में अवसर की समता' का मौलिक अधिकार स्वतः प्राप्त होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 6 के तहत यदि कोई व्यक्ति 19 जुलाई 1948 को या उसके बाद पाकिस्तान से भारत आया है, तो वह भारत का नागरिक तभी बन सकता है जब उसने प्रव्रजन की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर भारत सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष पंजीकरण कराया हो। यदि वह 19 जुलाई 1948 से पूर्व आया था, तो केवल माता-पिता या दादा-दादी के भारत में पैदा होने तथा प्रव्रजन के बाद से सामान्य निवास करने पर वह नागरिक बन जाता था (पंजीकरण आवश्यक नहीं था)। कथन 2 सत्य है; नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार देशीकरण द्वारा नागरिकता के लिए आवेदक को आवेदन से ठीक पहले 12 महीने निरंतर और उससे पहले के 14 वर्षों में कुल 11 वर्ष (कुल 12 वर्ष) भारत में बिताना अनिवार्य है। कथन 3 असत्य है क्योंकि OCI कार्डधारकों को भारत के नागरिकों की तरह अनुच्छेद 16 (लोक रोजगार की समता) या राजनीतिक अधिकार (जैसे मतदान या चुनाव लड़ना) प्राप्त नहीं होते हैं। अधिक अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित ऐतिहासिक संदर्भों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के भू-भाग को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयक के संबंध में संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार (View) राष्ट्रपति या संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह प्रतिपादित किया गया था कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को प्राप्त 'क्षेत्र में परिवर्तन करने की शक्ति' में किसी भारतीय भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपना (Cession) भी शामिल है, और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि इसे साधारण बहुमत से ही पारित किया जा सकता है। 3. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए 100वें संविधान संशोधन अधिनियम (2015) के माध्यम से कुछ अंतःक्षेत्रों (Enclaves) का आदान-प्रदान किया गया, क्योंकि किसी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि अनुच्छेद 3 इसके दायरे में नहीं आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार' (अनुच्छेद 29 और 30) तथा संवैधानिक उपचारों के अधिकार (अनुच्छेद 32) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 29(1) भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी भी वर्ग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार प्रदान करता है, और यह सुरक्षा का अधिकार केवल अल्पसंख्यक (Minority) वर्गों तक ही सीमित न होकर बहुसंख्यक वर्ग के नागरिकों के लिए भी उपलब्ध है। 2. अनुच्छेद 30(1) के अंतर्गत सभी अल्पसंख्यकों को, चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर, अपनी रुचि की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार प्रदान किया गया है, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि यदि राज्य ऐसी अल्पसंख्यक संस्थाओं की संपत्ति का अनिवार्य अधिग्रहण करता है, तो वह ऐसा बाजार मूल्य से कम प्रतिकार (Compensation) देकर नहीं कर सकता। 3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार क्षेत्र केवल मूल अधिकारों के हनन तक ही सीमित है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों (Legal Rights) के उल्लंघन के मामलों में भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के गठन, उसकी संरचना और 'विधान परिषद' (Legislative Council) के उत्सादन या सृजन (Abolition or Creation) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते कि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का एक संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे। 2. अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या चालीस से कम नहीं हो सकती है। 3. विधान परिषद की संरचना के संदर्भ में, इसके कुल सदस्यों का एक-तिहाई भाग स्थानीय निकायों (जैसे नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों) के निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, तथा एक-तिहाई भाग राज्य के विश्वविद्यालयों के स्नातकों (Graduates) द्वारा चुना जाता है, जिन्हें स्नातक किए हुए कम से कम तीन वर्ष हो चुके हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य के लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय के संयुक्त परामर्श से की जाती है, और इसके लिए यह अनिवार्य है कि नियुक्ति के समय वह व्यक्ति कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से सेवारत न हो। 3. अनुच्छेद 237 के प्रावधान के अंतर्गत राज्यपाल सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकता है कि अधीनस्थ न्यायपालिका से संबंधित कुछ विशिष्ट वर्ग के मजिस्ट्रेटों पर भी संविधान के अध्याय VI के उपबंध (अनुच्छेद 233 से 235 तक) तदनुसार लागू होंगे जैसे कि वे जिला न्यायाधीशों पर लागू होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य विधानमंडल के संदर्भ में, विधानसभा और विधान परिषद की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों की प्रक्रिया तथा उनके आपसी गतिरोध के समाधान से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधानसभा द्वारा कोई साधारण विधेयक दूसरी बार पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, और विधान परिषद उसे पुनः अस्वीकार कर देती है या ऐसा संशोधन करती है जिसे विधानसभा स्वीकार नहीं करती, तो विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम चार महीने (प्रथम बार के तीन महीने और पुनः भेजने पर एक महीना) तक ही रोक सकती है, जिसके पश्चात वह विधान परिषद की सहमति के बिना दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है। 2. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में विधान परिषद की शक्ति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस करना होता है, और यदि परिषद 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। 3. संसद के विपरीत, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) के बीच किसी साधारण विधेयक पर उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है, क्योंकि विधानसभा की इच्छा विधान परिषद पर सर्वोपरि होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.