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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को अमेरिकी क्रांति से लिया गया है।
  2. 2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से माना था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
  3. 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का अंग है और विधायिका इसमें संशोधन कर सकती है, बशर्ते यह संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, न कि अमेरिकी क्रांति से; जबकि न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से लिया गया है। कथन 2 असत्य है क्योंकि 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है। कथन 3 सत्य है, 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने बेरूबारी वाद के निर्णय को पलटते हुए यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है बशर्ते मूल ढांचे को क्षति न पहुँचे। भारतीय राजव्यवस्था के ऐसे ही महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से पढ़ने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर क्लिक करें।
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