Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 13 times
भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की शक्तियों, आचार संहिता और चुनाव सुधारों से संबंधित विभिन्न वैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यों में होने वाले पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी भी इसी केंद्रीय निर्वाचन आयोग की होती है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'मोहित सिंह बनाम निर्वाचन आयोग' और अन्य ऐतिहासिक मामलों में यह स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग वैधानिक कानूनों (जैसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम) की अनुपस्थिति में या उनके पूरक के रूप में स्वतंत्र रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है।
- 3. 'आदर्श आचार संहिता' (Model Code of Conduct) को कानूनी रूप से भारतीय संसद द्वारा पारित किसी विशेष अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक दर्जा प्राप्त है, जिसके उल्लंघन पर सीधे तौर पर दंडात्मक कार्रवाई और कारावास का प्रावधान संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243K और 243ZA के अनुसार, राज्यों में पंचायतों और नगरपालिकाओं (स्थानीय निकायों) के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी केंद्रीय निर्वाचन आयोग की नहीं, बल्कि प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल द्वारा नियुक्त 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) की होती है। कथन 2 सत्य है; उच्चतम न्यायालय (जैसे 'मोहित सिंह वाद' और 'कनू सान्याल वाद' या अन्य निर्वाचन मामलों में) ने यह दोहराया है कि अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग के पास व्यापक निहित शक्तियां हैं, और जहां कानून मौन हैं, वहां आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'आदर्श आचार संहिता' (Model Code of Conduct) को किसी विधायी अधिनियम द्वारा वैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है; यह राजनीतिक दलों और सरकारों की आपसी सहमति से निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार किया गया एक नैतिक दिशा-निर्देश है, हालांकि इसके कई प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम या भारतीय दंड संहिता के अन्य प्रावधानों के माध्यम से प्रवर्तनीय होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जाएं।
अगला प्रश्न →
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)…
Related Questions
→
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) के पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार सीधे संविधान में निहित है, जिसके लिए उन्हें किसी राजनयिक या कौंसलिया (Consular) अधिकारी के समक्ष आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती है।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 में वर्ष 2019 में किए गए संशोधन (CAA, 2019) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए विशेष उपबंध किए गए हैं, तथा इस अधिनियम के दायरे से संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को पूरी तरह बाहर रखा गया है।
3. संविधान के अनुच्छेद 11 के अंतर्गत संसद को नागरिकता के अर्جين और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान की गई है, और इस शक्ति का प्रयोग केवल संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) के माध्यम से ही किया जा सकता है, साधारण विधि द्वारा नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया, उनके पद की शक्तियों तथा प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्वों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य होते हैं, तथा इसमें राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी भाग लेते हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक और संवैधानिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से मंत्रिपरिषद के सदस्य राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे तथा राष्ट्रपति द्वारा मांगी जाने वाली समस्त सूचनाएं उन्हें अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की पदावधि उनके पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए यह आयु सीमा बासठ वर्ष निर्धारित की गई है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, और कदाचार के इस आरोप की जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है, जिसके द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति पर पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें निलंबित करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1-4) के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत' अर्थात 'इंडिया' राज्यों का संघ (Union of States) होगा, न कि राज्यों का फेडरेशन (Federation of States), क्योंकि यह व्यवस्था इस तथ्य को दर्शाती है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच हुए किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का कोई अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमा या नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास भेजा गया विचार या मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होता है, भले ही राज्य विधानमंडल ने निश्चित समयावधि के भीतर अपना मत प्रेषित कर दिया हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबाड़ी यूनियन वाद' (1960) में दिए गए परामर्श के विपरीत, वर्ष 1969 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक अन्य निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of Territory) के लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कार्यपालिका के कार्यकारी आदेश (Executive Action) द्वारा ही संपन्न किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.