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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1-4) के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत' अर्थात 'इंडिया' राज्यों का संघ (Union of States) होगा, न कि राज्यों का फेडरेशन (Federation of States), क्योंकि यह व्यवस्था इस तथ्य को दर्शाती है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच हुए किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का कोई अधिकार प्राप्त है।
  2. 2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमा या नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास भेजा गया विचार या मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होता है, भले ही राज्य विधानमंडल ने निश्चित समयावधि के भीतर अपना मत प्रेषित कर दिया हो।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबाड़ी यूनियन वाद' (1960) में दिए गए परामर्श के विपरीत, वर्ष 1969 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक अन्य निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of Territory) के लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कार्यपालिका के कार्यकारी आदेश (Executive Action) द्वारा ही संपन्न किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 1 में 'राज्यों का संघ' (Union of States) शब्दावली का प्रयोग किया गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार, 'फेडरेशन' के स्थान पर 'यूनियन' शब्द का चयन इसलिए किया गया क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी आपसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी घटक राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।

कथन 2 सही है: अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी भी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमा बदल सकती है। इसके लिए राष्ट्रपति संबंधित राज्य के विधानमंडल को विधेयक भेजते हैं, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया विचार या मत राष्ट्रपति या संसद पर बिल्कुल भी बाध्यकारी नहीं होता है। संसद राज्य की सहमति के बिना भी ऐसा कानून बना सकती है।

कथन 3 गलत है: 'बेरूबाड़ी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि भारत के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य है (जैसे 9वें संविधान संशोधन द्वारा बेरूबाड़ी क्षेत्र पाकिस्तान को सौंपा गया था)। कार्यपालिका के साधारण आदेश से ऐसा नहीं किया जा सकता।

अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, उनके न्यायाधीशों की स्वतंत्रता तथा अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय की यह रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय की अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्राप्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक विस्तृत (Wider) है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात किए जाते हैं, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम पिछले सात वर्षों से अधिवक्ता या बैरिस्टर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो। 3. अनुच्छेद 235 के तहत राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टियों से संबंधित नियंत्रण शामिल है, पूरी तरह से राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई परामर्शदात्री या निर्णायक भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना इस देश के नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को सुनिश्चित करती है, और इन तीनों प्रकार केन्याय के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से भारतीय संविधान में प्रेरणा के रूप में शामिल किया गया था। 2. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान के 'मूलभूत ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए। 3. मूल संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, और यह आज तक का प्रस्तावना में एकमात्र संशोधन है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, शक्तियों और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय का मूल और अनन्य (Original and Exclusive) क्षेत्राधिकार केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच के किसी कानूनी विवाद में विस्तार रखता है, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसी संधि, समझौते या कवनेंट (Covenant) से उत्पन्न न हुआ हो जो संविधान के प्रारंभ होने से पहले किया गया था और अभी भी लागू है। 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए यह संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है कि वह अपनी राय राष्ट्रपति को प्रेषित करे, तथा ऐसी राय के आधार पर सरकार कार्य करने के लिए भी पूर्णतः बाध्य होती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय (Court of Record) का दर्जा प्राप्त है, जिसका अर्थ यह है कि इसके निर्णय और अभिलेख साक्ष्यों के रूप में स्वीकार किए जाते हैं और देश के किसी भी न्यायालय में उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता, तथा इसे अपने अवमान (Contempt of Court) के लिए दंडित करने की शक्ति भी प्राप्त है जिसमें संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन साधारण कारावास या जुर्माना शामिल है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? लोकसभा अध्यक्ष को पद की शपथ कौन दिलाता है? भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत राष्ट्रपति किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर संयुक्त बैठक आहूत कर सकता है, किंतु यह प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) और संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) दोनों पर समान रूप से लागू होता है। 2. लोकसभा के विघटन के कारण व्यपगत (Lapse) होने वाले विधेयकों के संबंध में नियम यह है कि लोकसभा में लंबित कोई भी विधेयक, जो राज्यसभा द्वारा पारित नहीं किया गया हो, लोकसभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है, किंतु यदि कोई विधेयक राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, तो वह लोकसभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है। 3. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि वह अनुपस्थित हो, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष तथा उसकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा का उपसभापति इस बैठक की अध्यक्षता करता है (राज्यसभा का सभापति कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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