BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 21 times

भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी समितियों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद की किसी भी प्रक्रिया में मतदान (Voting) करने का कोई अधिकार नहीं है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा अपनी पदमुक्ति के पश्चात् वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार का अन्य लाभ का पद (Office of Profit) धारण करने का पात्र नहीं होता है।
  3. 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' के रूप में कार्य करता है, और CAG द्वारा तैयार किए गए केंद्र के लेखा-परीक्षा प्रतिवेदनों को सीधे प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया जाता है, जो उन्हें संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 76 के तहत महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है और उसे संसद में बोलने का अधिकार है लेकिन मतदान का अधिकार नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि CAG को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है और वह सेवानिवृत्ति के बाद सरकार के अधीन कोई पद धारण नहीं कर सकता। कथन 3 गलत है क्योंकि CAG अपने प्रतिवेदन (Reports) राष्ट्रपति को सौंपता है, न कि प्रधानमंत्री को, और राष्ट्रपति उन्हें संसद के पटल पर रखवाते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' के… ← पिछला प्रश्न भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और…

Related Questions

→ भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और देश में चुनाव सुधारों से संबंधित समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की स्थापना एक स्थायी निकाय के रूप में की गई है, जिसमें मूल रूप से एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों का प्रावधान संविधान निर्माताओं द्वारा किया गया था। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने यह प्रमुख संस्तुति की थी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में सरकारी धन और संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्य द्वारा वित्तपोषण (State Funding of Elections) की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जानी चाहिए। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में वर्ष 1996 के संशोधन के पश्चात यह प्रावधान किया गया कि चुनाव प्रचार की अवधि को मतदान समाप्त होने के लिए निर्धारित समय से 48 घंटे पूर्व समाप्त (Silence Period) कर दिया जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनैतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में 'अंग्रेज़ी' और 'राजस्थानी' भाषाओं को अभी तक आधिकारिक रूप से शामिल नहीं किया गया है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा से संबंधित उपबंध किए गए हैं, जिसके तहत अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। 3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसके तहत दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्हता से संबंधित उपबंध किए गए हैं, और इस अनुसूची के अंतर्गत दलबदल से जुड़े किसी विवाद पर अंतिम निर्णय लेने की शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के पास होती है, जिसका न्यायिक पुनरावलोकन किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत 'भारतीय नागरिकता' और उससे संबंधित उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो अनुच्छेद 5, 6 या 8 के अंतर्गत प्राप्त उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उन मामलों में लागू नहीं होता जहाँ भारत सरकार और संबंधित विदेशी राष्ट्र के बीच दोहरी नागरिकता का विशिष्ट संधि समझौता हुआ हो। 2. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) पारित किया था, जिसमें अब तक कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। 3. अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसी नागरिकता का हकदार बना रहेगा, जिसका तात्पर्य यह है कि संसद किसी भी नागरिक की नागरिकता को बिना किसी विधि निर्माण के मनमाने ढंग से कार्यकारी आदेश द्वारा छीन सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग II के अंतर्गत 'नागरिकता' (अनुच्छेद 5-11) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उस स्थिति में लागू नहीं होता जब भारत में युद्ध की स्थिति चल रही हो। 2. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) पारित किया था। 3. नागरिकता अधिनियम, 1955 में अब तक हुए संशोधनों (विशेषकर नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019) के पश्चात, अब भारत में जन्म से नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जन्म के समय माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) न हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.