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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य, ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा यह नीति निर्देशक तत्व प्रकृति से न्यायोचित (Justiciable) है, जिससे नागरिक इसके क्रियान्वयन के लिए सीधे न्यायालय की शरण ले सकते हैं।
  2. 2. अनुच्छेद 45 के मूल पाठ में यह प्रावधान था कि राज्य, इस संविधान के प्रारंभ होने से दस वर्ष की अवधि के भीतर, सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए प्रयास करेगा, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रावधान बनाया गया।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार राज्य, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करने, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानजनक संबंधों को बनाए रखने, और अंतर्राष्ट्रीय विवादों के मध्यस्थता द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने का प्रयास करेगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार राज्य के नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि निर्माण में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये प्रकृति से न्यायोचित (Non-Justiciable) हैं, अर्थात इनके उल्लंघन या क्रियान्वयन न होने पर किसी भी न्यायालय द्वारा इन्हें लागू करने के लिए रिट या आदेश जारी नहीं कराया जा सकता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि मूल संविधान के अनुच्छेद 45 में 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान था, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित कर अनुच्छेद 21-A के तहत मौलिक अधिकार बना दिया गया तथा अनुच्छेद 45 को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित बनाया गया। कथन 3 सत्य है, क्योंकि अनुच्छेद 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि से संबंधित है। संविधान के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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