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Indian Polity
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भारतीय संविधान सभा के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के कुल 389 सदस्यों में से 296 सदस्य ब्रिटिश भारत से और 93 सदस्य देशी रियासतें से आने थे, जिनमें ब्रिटिश भारत के 296 सदस्यों में से 292 गवर्नरों के प्रांतों से और 4 मुख्य कमिश्नर क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कूर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से थे।
  2. 2. संविधान सभा के निर्वाचन में प्रत्येक प्रांत को उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं, जहाँ सामान्य, मुस्लिम और सिख—इन तीन प्रमुख समुदायों में सीटों का आबंटन किया गया था, और प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं में उस समुदाय के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया गया था।
  3. 3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, जिसमें संविधान सभा का अस्तित्व समाप्त हो गया और उसने तुरंत भंग होकर भारत की 'अंतरिम संसद' (Provisional Parliament) के रूप में कार्य करना बंद कर दिया, क्योंकि उसी दिन भारत के पहले आम चुनावों के बाद निर्वाचित संसद का गठन हो चुका था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान सभा की कुल निर्धारित संख्या 389 थी, जिसमें 296 ब्रिटिश भारत और 93 देशी रियासतों के लिए थीं। ब्रिटिश भारत की 296 सीटों में से 292 ग्यारह गवर्नरों के प्रांतों से और 4 मुख्य कमिश्नर क्षेत्रों से थे। कथन 2 सही है: सीटों का आबंटन जनसंख्या के आधार पर (लगभग 10 लाख की आबादी पर 1 सीट) किया गया था। प्रांतों की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों- मुस्लिम, सिख और सामान्य (मुस्लिम व सिख को छोड़कर अन्य सभी) में बांटा गया था। प्रांतीय विधानसभाओं में संबंधित समुदायों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से इनका चुनाव हुआ था। कथन 3 गलत है: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई थी, लेकिन यह भंग नहीं हुई थी; बल्कि इसने 26 जनवरी 1950 से नए संविधान के लागू होने के बाद आम चुनावों के पश्चात नई संसद के गठन तक 'भारत की अंतरिम संसद' के रूप में कार्य जारी रखा था। आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के माध्यम से ऐसी ऐतिहासिक जानकारियों को और गहराई से समझ सकते हैं।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय प्रशासनिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि ऐसी परिषद् की स्थापना से लोकहित होगा, तो वह संघ और राज्यों के बीच अथवा राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले उन विवादों की जाँच कर सकता है और उन पर सलाह दे सकता है जिनका स्वरूप विशुद्ध रूप से कानूनी (Legal) होता है। 2. अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, और इस परिषद् के स्थायी सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री (जहाँ विधानसभा है), तथा प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कैबिनेट स्तर के छह मंत्री शामिल होते हैं। 3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) ने अपनी रिपोर्ट में यह संस्तुति की थी कि अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय (Permanent Body) के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, जिसे वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद् आदेश, 1990' के माध्यम से औपचारिक रूप से अस्तित्व में लाया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में प्रयुक्त शब्दावली, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है, और यह अवधारणा ब्रिटिश राजशाही प्रणाली के विपरीत अमेरिकी संविधान से प्रेरित है। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'गोलकनाथ वाद' (1967) में यह अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान की मूल आत्मा है और संसद को अनुच्छेद 368 के तहत भी प्रस्तावना में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि यह संविधान का एक अनन्य भाग है जिसमें कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता। 3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के विचार को बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाई जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संवैधानिक प्रावधानों, स्वतंत्रता, कार्यकाल तथा उनके प्रतिवेदनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि उनमें से प्रत्येक राज्य की कुछ या सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए एक संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन किया जाए, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्यों के राज्यपालों द्वारा संयुक्त रूप से की जाती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य या अध्यक्ष को उसके पद से केवल 'कदाचार' के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह संघ आयोग का हो या राज्य आयोग का, किंतु ऐसा करने से पूर्व उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच प्रतिवेदन में उस हटाने के औचित्य की संस्तुति होना अनिवार्य है। 3. संविधान के अनुच्छेद 323 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग अपने कार्यों की वार्षिक प्रगति का प्रतिवेदन (Report) राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है, जिसे राज्यपाल राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधाई शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम उन मामलों पर लागू नहीं होता जहाँ भारत सरकार द्वारा युद्ध काल की घोषणा की गई हो। 2. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस संवैधानिक शक्ति के तहत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर के भू-भाग पर भी लागू होता है (एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ऑपरेशन)। 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उनके लिए देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की आवश्यक निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? ल्यूमेन (Lumen) एकक है?
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