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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की स्वतंत्रता, संरचना और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया तथा आधार वही होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित अनुशंसा के बिना किसी भी परिस्थिति में पद से नहीं हटाया जा सकता है।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु वर्ष 1998 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत निर्वाचन आयोग को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त हो गया है कि वह किसी पंजीकृत राजनीतिक दल द्वारा आंतरिक लोकतंत्र के हनन या संविधान के प्रति निष्ठा के अभाव पर उसका पंजीकरण रद्द (De-register) कर सकता है।
- 3. भारत में electoral funding (चुناवी वित्तपोषण) में पारदर्शिता लाने और चुनावी सुधारों के क्रम में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'एस.डी. एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2024)' के ऐतिहासिक निर्णय में 'चुनावी बॉन्ड योजना' (Electoral Bonds Scheme) को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, क्योंकि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) का उल्लंघन करती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया और आधारों पर ही हटाया जा सकता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों या प्रादेशिक आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की 'सिफारिश' पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, बिना सिफारिश के नहीं—यह प्रावधान अन्य आयुक्तों को अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि भारत निर्वाचन आयोग के पास किसी पंजीकृत राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द (De-register) करने की अंतर्निहित वैधानिक शक्ति (Inherent Power) जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत प्राप्त नहीं है। कथन 3 सत्य है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने 'एस.डी. एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2024)' मामले में चुनावी बॉन्ड योजना को पूर्णतः असंवैधानिक करार दिया था। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही उसके पद से हटाया जा सकता है, और इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय को जाँच के लिए भेजा जाना अनिवार्य है, तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 319 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के पात्र नहीं होते हैं।
3. अनुच्छेद 322 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिसमें आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों को देय या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) होते हैं, और इन पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से ब्रिटिश प्रांतों के 293 प्रतिनिधि और देशी रियासतें के 93 प्रतिनिधि शामिल थे, तथा प्रत्येक प्रांत की सीटों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में तीन प्रमुख समुदायों- मुस्लिम, सिख और सामान्य (Muslim, Sikh and General) में विभाजित किया गया था।
2. संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा द्वारा कई समितियों का गठन किया गया था, जिनमें संघ संविधान समिति और प्रांतीय संविधान समिति दोनों के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।
3. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे संविधान का प्रारूप तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था, में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य थे और इसका गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को कौन नियुक्त करता है?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' और 'विधान परिषद' की वित्तीय शक्तियों, धन विधेयकों (Money Bills) तथा विशेषाधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक राज्य की विधान परिषद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है, और जब विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 30 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
2. यदि राज्य की विधान परिषद किसी धन विधेयक को निर्धारित 14 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस नहीं करती है, या उस पर अपनी कोई सहमति नहीं देती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित हुआ माना जाएगा जैसा कि उसे विधानसभा ने पारित किया था।
3. संविधान के अनुच्छेद 197 के प्रावधानों के तहत, धन विधेयक को छोड़कर अन्य किसी भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) के संबंध में यदि विधानसभा और विधान परिषद के बीच गतिरोध उत्पन्न होता है, तो संसद की भाँति राज्य विधानमंडल के लिए भी संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) संविधान के किस भाग में वर्णित हैं?
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