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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा के गठन एवं विशेषाधिकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 निर्धारित की गई है, जिनमें से अधिकतम 530 सदस्य राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं और अधिकतम 20 सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, तथा 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के लिए आरक्षित दो सीटों के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
- 2. राज्यसभा में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य निर्वाचक मंडल के रूप में भाग लेते हैं।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 105 के अंतर्गत संसद के सदस्यों को मिलने वाले संसदीय विशेषाधिकारों के तहत उन्हें संसद या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही से उन्मुक्ति प्राप्त होती है, और यह सुरक्षा सदन के सत्र के दौरान या उससे पहले गिरफ्तारी से सिविल मामलों में भी पूर्ण संरक्षण प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 है (राज्यों से 530 और संघ राज्य क्षेत्रों से 20)। 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों के मनोनयन को समाप्त कर दिया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि राज्यसभा के चुनाव में राज्य विधानसभाओं के केवल निर्वाचित सदस्य ही भाग लेते हैं, मनोनीत सदस्य नहीं। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि संसदीय विशेषाधिकारों के तहत संसद सदस्यों को सदन के सत्र के दौरान और उसके प्रारंभ होने से 40 दिन पूर्व तथा समाप्त होने के 40 दिन पश्चात तक केवल सिविल मामलों में ही गिरफ्तारी से मुक्ति मिलती है, दांडिक (आपराधिक) मामलों या निवारक नजरबंदी में यह सुरक्षा प्राप्त नहीं होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
Related Questions
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों और राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 भाषाएँ कर दिया गया है, किंतु इस अनुसूची में अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा को अभी तक शामिल नहीं किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का विस्तार से उपबंध किया गया है, जिसके तहत संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी और अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप निर्धारित किया गया है, साथ ही संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा 1965 के पश्चात भी सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्योग्यता से संबंधित प्रावधान करती है, और इसके तहत किसी राजनीतिक दल के विलय (Merger) के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य दल-विभाजन या विलय के पक्ष में सहमत हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग, राजभाषा और अनुसूचियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों व विधेयकों के पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होंगे, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।
2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' भाषा को भी शामिल किया गया है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सदस्य की अयोग्यता से संबंधित विवाद पर निर्णय लेने की अंतिम शक्ति संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) में निहित होती है, और इस पर न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार पूर्णतः प्रतिबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के उच्च सदन यानी 'विधान परिषद' (Legislative Council) के गठन, उत्सादन (Abolition) और उसकी संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद, किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते कि संबंधित राज्य की विधानसभा ने इस आशय का एक प्रस्ताव सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया हो।
2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, और किसी भी स्थिति में विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, सिवाय उस अपवाद के जहाँ संसद विधि द्वारा कोई विशेष उपबंध करे।
3. विधान परिषद के कुल सदस्यों का एक-तिहाई भाग स्थानीय संस्थाओं (जैसे नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों) के निर्वाचक मंडल द्वारा, एक-तिहाई भाग राज्य की विधानसभा के सदस्यों द्वारा (जो विधानसभा के सदस्यों में से नहीं हैं), एक-छठा भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों में से मनोनीत किया जाता है, तथा शेष सदस्य स्नातकों और अध्यापकों के अलग-अलग निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, विशेषकर अध्यादेश निर्माण (अनुच्छेद 213) और मुख्यमंत्री की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु इसके लिए आवश्यक है कि राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने स्वविवेक से करे, भले ही इसके लिए उसे मंत्रिपरिषद से परामर्श न लेना पड़े।
2. राज्यपाल द्वारा जारी प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनर्गठन या सत्रारंभ होने के पश्चात विधानमंडल के समक्ष रखना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल उस पर कोई संकल्प पारित नहीं करता है, तो वह अध्यादेश विधानमंडल के पुनर्समवेत होने से छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर निष्प्रभावी हो जाता है।
3. राज्य में मुख्यमंत्री की नियुक्ति के संबंध में राज्यपाल को पारंपरिक रूप से यह विवेकाधिकार प्राप्त है कि यदि किसी भी दल या गठबंधन को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो, तो वह सरकार गठन के लिए सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को आमंत्रित करने में अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक विवेक बुद्धि का प्रयोग कर सकता है, और इस प्रकार नियुक्त मुख्यमंत्री को एक निश्चित समयावधि के भीतर सदन में अपना बहुमत सिद्ध करना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं, जहाँ सामान्य, मुस्लिम और सिख—इन तीन प्रमुख समुदायों के आधार पर सीटों का बँटवारा किया गया था।
2. संविधान सभा में रियासतें (Princely States) शामिल नहीं हुई थीं क्योंकि उनके शासकों ने प्रारंभ से ही संविधान सभा के बहिष्कार का निर्णय लिया था, जिसके परिणामस्वरूप संविधान सभा में रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन केवल मनोनयन के आधार पर हुआ था और उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।
3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, तथा फ्रांस की परंपरा का अनुसरण करते हुए सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Pro-tem Chairman) चुना गया था, जबकि बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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