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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया तथा आधार वही होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय पदमुक्त किया जा सकता है।
  2. 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के अनुसार, राजनीतिक दलों द्वारा लोकसभा या विधानसभा चुनावों के लिए अपने 'स्टार प्रचारकों' की सूची नामांकन की अंतिम तिथि से सात दिन के भीतर संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपनी अनिवार्य होती है।
  3. 3. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों और चुनाव सुधारों के तहत, वर्ष 2013 में लोकहित फाउंडेशन मामले के बाद से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ 'वीवीपैट' (VVPAT) प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, जिससे मतदाताओं को यह सत्यापित करने का अवसर मिलता है कि उनका मत उनके द्वारा चुने गए उम्मीदवार को ही गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के परंतुक के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना किसी भी अन्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से नहीं हटाया जा सकता। कथन 2 गलत है क्योंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77 के तहत राजनीतिक दलों को चुनाव अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के भीतर (या कुछ मामलों में नामांकन दाखिल होने के समय के अनुसार) स्टार प्रचारकों की सूची निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजनी होती है, न कि अंतिम तिथि से सात दिन के भीतर। कथन 3 पूरी तरह सही है; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए VVPAT प्रणाली को ईवीएम के साथ जोड़ा गया है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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→ भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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