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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये प्रावधान किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता।
  2. 2. अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित समाजवादी सिद्धांतों के कार्यान्वयन के संबंध में 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C जोड़ा गया, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि यदि कोई विधि अनुच्छेद 39(b) या (c) में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाई जाती है, तो उसे इस आधार पर शून्य नहीं ठहराया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करती है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में अनुच्छेद 31C के उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था, जिसके अंतर्गत नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने वाली विधियों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में अंतर्निहित राज्य के नीति निर्देशक तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश के संचालन में इन सिद्धांतों को अपनाना राज्य का कर्तव्य होगा, हालांकि ये गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं। 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 31C का अंतःस्थापन किया गया, जिसने DPSP (विशेषकर अनुच्छेद 39b और 39c) को मूल अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 19) पर प्राथमिकता दी। इसके अलावा, 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में उच्चतम न्यायालय ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया कि यद्यपि DPSP को प्राथमिकता दी जा सकती है, किंतु अनुच्छेद 31C के उस हिस्से को असंवैधानिक करार दिया गया जो इन कानूनों की न्यायिक समीक्षा पर पूर्ण रोक लगाता था, क्योंकि न्यायिक समीक्षा संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का अभिन्न अंग है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ें।
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