त्वरित लिंक्स
Indian Polity
12 views
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के आधे सदस्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उन्होंने नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्षों तक पद धारण किया हो।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने की शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है।
- 3. अनुच्छेद 322 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिसमें आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों को देय या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) होते हैं, और इन पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार आयोग के सदस्यों के लिए यह आवश्यक है कि उनमें से लगभग आधे सदस्यों के पास यह अर्हता होनी चाहिए कि उन्होंने नियुक्ति की तारीख से कम से कम दस वर्ष तक भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन पद धारण किया हो, किंतु यह कोई कठोर एवं पूर्णतः निश्चित 'अनिवार्य शर्त' या अनुपात नहीं है जैसा कि कथन में निरूपित किया गया है। इसके अलावा, कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। अनुच्छेद 318 के तहत संघ आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें राष्ट्रपति और राज्य आयोग के लिए राज्यपाल द्वारा निर्धारित की जाती हैं, तथा अनुच्छेद 322 के तहत आयोग के सभी प्रशासनिक व्यय संचित निधि पर भारित होते हैं। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अध्यायों को देख सकते हैं।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोकहित में यह प्रतीत होता है कि अंतर-राज्यीय परिषद् का गठन किया जाना चाहिए, तो वह ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है और उसके द्वारा किए जाने वाले कृत्यों, उसकी संरचना तथा पद्धति को परिभाषित कर सकता है, तथा इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है।
2. अनुच्छेद 249 के उपबंधों के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर विधि बना सकती है, तो संसद उस विषय पर संपूर्ण देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. प्रशासनिक संबंधों के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 257 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा जिससे संघ की कार्यकारी शक्ति के प्रयोग में कोई बाधा न पड़े या उस पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, और संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार राज्यों को इस प्रयोजन के लिए आवश्यक निर्देश देने तक होता है कि वे अपने क्षेत्र में रेलमार्गों और संचार के साधनों के रखरखाव तथा उनके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाएं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और इसके ऐतिहासिक विकास तथा न्यायिक व्याख्याओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
2. वर्ष 1960 के 'बेरूबारी यूनियन वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं किया जा सकता है।
3. वर्ष 1973 के ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती वाद' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक भाग है, और इसमें संसद द्वारा संशोधन किया जा सकता है बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न हो।
4. प्रस्तावना में अब तक कुल दो बार संशोधन किया जा चुका है - पहला 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा तथा दूसरा 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंधित किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर ही की जा सकती है, तथा मंत्रिमंडल की लिखित संस्तुति (Written Recommendation) प्राप्त होने के पश्चात् ही राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा कर सकता है।
3. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी घोषणा की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, और एक बार अनुमोदित होने के पश्चात यह आपातकाल अनिश्चित काल तक तब तक प्रवर्तन में रहता है जब तक कि इसे राष्ट्रपति द्वारा वापस न लिया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (State Legislature) की संरचना, विधान परिषद के गठन, उत्सादन तथा उसकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे, और ऐसा विधि निर्माण अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन माना जाता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं हो सकती है, सिवाय उस स्थिति के जहाँ संसद विधि द्वारा कोई विशेष उपबंध करे।
3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन में, एक-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचक मंडल द्वारा, एक-तिहाई सदस्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा अपने से भिन्न व्यक्तियों में से, एक-बारहवें सदस्य तीन वर्ष से स्नातकों द्वारा, तथा एक-बारहवें सदस्य कम से कम तीन वर्ष से अध्यापन कर रहे माध्यमिक विद्यालयों से उच्च स्तर के शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं, और शेष एक-तिहाई सदस्यों को राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किया जाता है।
4. साधारण विधेयक के मामले में गतिरोध उत्पन्न होने पर, यदि विधान परिषद किसी विधेयक को अस्वीकृत कर देती है या विधानसभा द्वारा पारित संशोधन से असहमत होती है या विधेयक को तीन महीने तक रोक लेती है, तो विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए जाने पर विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम एक महीने की अवधि के लिए और रोक सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को 'रिट' (Writ) जारी करने की शक्ति देता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.