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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
  2. 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  3. 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 31C के तहत अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के क्रियान्वयन को मूल अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 19) पर प्राथमिकता देने का यह विशेष प्रावधान मूल संविधान में नहीं था, बल्कि इसे 25वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा जोड़ा गया था, न कि मूल संविधान में। कथन 2 सत्य है; यद्यपि DPSP गैर-न्यायवादी (Non-justiciable) हैं, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में यह स्पष्ट किया कि संविधान की नींव मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के संतुलन पर टिकी है और यह संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का अभिन्न अंग है। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 48 में गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध का प्रतिषेध करने का निर्देश 'गांधीवादी विचारधारा' (Gandhian Ideology) पर आधारित है, न कि समाजवादी विचारधारा पर। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अंतर्गत DPSP से जुड़े इन अनुच्छेदों का अध्ययन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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