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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 38 के अंतर्गत राज्य से यह अपेक्षा की गई है कि वह ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करे जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राज्य विशेष रूप से आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा।
  2. 2. अनुच्छेद 40 के तहत राज्य ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियां प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, और यह प्रावधान केवल गांधीवादी विचारधारा पर आधारित है जिसका किसी भी अन्य निदेशक तत्व से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
  3. 3. अनुच्छेद 45 के मूल पाठ में यह प्रावधान था कि राज्य इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए प्रयास करेगा, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित करके प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध अनुच्छेद 39(f) के साथ समायोजित कर दिया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 38 के खंड (2) को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था, जिसके अनुसार राज्य, विशेष रूप से, आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और न केवल व्यक्तियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए लोगों के समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का प्रयास करेगा। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन) गांधीवादी विचारधारा पर आधारित जरूर है, किंतु इसका अन्य नीति निर्देशक तत्वों जैसे कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 43) और सहकारी समितियों का संवर्धन (अनुच्छेद 43B) के साथ वैचारिक समन्वय और गहरा संबंध है, तथा इसे केवल 'अन्य तत्वों से अप्रत्यक्ष संबंध' कहना तकनीकी रूप से अनुचित है। कथन 3 पूर्णतः सही है; मूल संविधान में अनुच्छेद 45 के अंतर्गत 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान था, जिसे 86वें संविधान संशोधन, 2002 के माध्यम से मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) बना दिया गया और अनुच्छेद 45 को संशोधित कर छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा (ECCV) का नया उपबंध जोड़ा गया। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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