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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा, दलबदल विरोधी कानून और संविधान की विभिन्न अनुसूचियों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा सरकारी प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (जैसे 1, 2, 3...) होगा, किंतु संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 1965 के बाद भी अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को प्राधिकृत कर सकती है।
  2. 2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों द्वारा बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' दोनों भाषाओं को शामिल किया गया है।
  3. 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के अपवाद के रूप में यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल में विलय (Merger) हो जाता है, तो उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य विलय के पक्ष में हैं, तो वे अयोग्यता से सुरक्षित रहेंगे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी (देवनागरी लिपि) और अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप निर्धारित किया गया है, साथ ही राजभाषा अधिनियम, 1963 के माध्यम से अंग्रेजी के प्रयोग को 1965 के बाद भी अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की अनुमति दी गई है। कथन 2 गलत है: संविधान की आठवीं अनुसूची में अंग्रेजी और राजस्थानी दोनों भाषाओं को वर्तमान में शामिल 22 भाषाओं में स्थान **नहीं** दिया गया है। कथन 3 सही है: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा दलबदल के नियम को कड़ा किया गया और दसवीं अनुसूची के तहत यह प्रावधान किया गया कि विलय (Merger) की स्थिति में मूल दल के कम से कम 2/3 सदस्यों का सहमत होना अनिवार्य है, अन्यथा अयोग्यता लागू होगी। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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