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Indian Polity
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में 'चार्टर अधिनियम, 1793' (Charter Act of 1793) और 'चार्टर अधिनियम, 1813' (Charter Act of 1813) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चार्टर अधिनियम, 1793 के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को भारत में अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के सदस्यों और उनके कर्मचारियों का वेतन भारतीय राजस्व (Indian Revenues) से ही दिया जाएगा।
  2. 2. चार्टर अधिनियम, 1813 ने भारत में कंपनी के चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर अन्य सभी व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया, तथा पहली बार भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रति वर्ष 1 लाख रुपये की राशि खर्च करने का वैधानिक प्रावधान किया गया।
  3. 3. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में ईसाई मिशनरियों को आकर लोगों को प्रबुद्ध करने और धर्म प्रचार करने की अनुमति दी गई, और साथ ही ब्रिटिश नागरिकों तथा कंपनियों के लिए भारत के साथ व्यापार को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखा गया जिसमें कोई छूट नहीं दी गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: चार्टर अधिनियम, 1793 के तहत कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया था और बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों व कर्मचारियों का वेतन भारतीय राजस्व से दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। कथन 2 सही है: चार्टर अधिनियम, 1813 द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया, किंतु चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार पर उसका एकाधिकार बना रहा; साथ ही शिक्षा के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। कथन 3 गलत है क्योंकि चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा ब्रिटिश नागरिकों और कंपनियों के लिए भारत के साथ व्यापार को कुछ प्रतिबंधों के साथ खोल दिया गया था (अर्थात व्यापारिक एकाधिकार समाप्त हुआ था), न कि पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया था। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल देख सकते हैं।
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→ राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति वही होती है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम की होती है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता यदि उस विषय पर राज्य विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक हो। 2. अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए भारसाधक एक पृथक् मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है। 3. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) के अंतर्गत उसे राज्य सूची के विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) के मामले में क्षमादान देने तथा सेना के न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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