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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इनमें से किसी भी आयोग के सदस्यों को अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) के लिए पात्र नहीं माना जाता है।
  2. 2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल साबित कदाचार (Proved Misbehavior) या असमर्थता के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, और इसके लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई जाँच रिपोर्ट का राष्ट्रपति के लिए मानना अनिवार्य होता है, भले ही राज्यपाल राज्य आयोग के मामले में हटाने की प्रक्रिया शुरू करता हो।
  3. 3. अनुच्छेद 323 के प्रावधानों के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग अपने कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, तथा राज्य लोक सेवा आयोग अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है, जिसे राज्यपाल राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का अध्यक्ष अपने कार्यकाल के बाद संघ या राज्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में तो नियुक्ति का पात्र हो सकता है, लेकिन भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता। इसी प्रकार राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष या सदस्य बनने अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए पात्र होता है, लेकिन वह भी अन्य सरकारी नियोजन के लिए पात्र नहीं होता। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं; UPSC और SPSC दोनों के सदस्यों/अध्यक्षों को हटाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है (कदाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की जाँच के उपरांत) और उनकी वार्षिक रिपोर्ट क्रमशः राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के माध्यम से संसद व विधानमंडल के पटल पर रखी जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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