BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
12 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोक हित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है, तथा इस परिषद् के निर्णयों को सभी राज्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी माना जाता है।
  2. 2. अनुच्छेद 258 के तहत राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से, उस सरकार को या उसके अधिकारियों को ऐसे कृत्यों की शक्ति प्रदान कर सकता है जो संघ की कार्यकारी शक्ति के अंतर्गत आते हैं।
  3. 3. अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतर-राज्यीय परिषद् की प्रकृति मुख्य रूप से परामर्शदात्री (Advisory) है। यह राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच कर सकती है और सामान्य हितों के विषयों पर विचार-विमर्श कर सकती है, किंतु इसके द्वारा दी गई सलाह या निर्णय राज्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी (Binding) नहीं होते हैं। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 258 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह संबंधित राज्य सरकार की सहमति से संघ के कार्यकारी कृत्यों को उस राज्य की सरकार या उसके अधिकारियों को सौंप सकता है। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है। अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। 2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है और न ही वह संसद में मतदान कर सकता है, किंतु महान्यायवादी के विपरीत CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद में प्रस्तुत नहीं करता है, बल्कि वह अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं। 3. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the President) पद धारण करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72) और उसकी विधायी तथा कार्यकारी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power) के अंतर्गत क्षमा, प्रलंबन, विराम, परिहार और लघुकरण शामिल हैं, और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग करते समय मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए पूर्णतः बाध्य है तथा राष्ट्रपति द्वारा इस पर लिया गया निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति केवल तभी प्रयोग की जा सकती है जब संसद के दोनों सदनों में से कोई एक सदन या दोनों सदन सत्र में न हों; इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की संविधि वही होती है जो संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम की होती है। 3. राष्ट्रपति को भारत के महान्यायवादी (Attorney General), नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG), मुख्य चुनाव आयुक्त तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राष्ट्रपति अपने स्वविवेक का प्रयोग करते हुए लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति के मामले में संविधान प्रदत्त अपने विवेक का उपयोग कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों से संबंधित संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, राजनीतिक दलों के दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्योग्यता के बारे में उपबंध करती है, और इसके अंतर्गत पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है तथा उसकी न्यायिक समीक्षा पूर्णतः वर्जित है। 2. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तथा किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या अन्य राजभाषा के प्रयोग को अधिकृत कर सकता है। 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संशोधनों के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को 71वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था। 4. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत किसी राजनीतिक दल को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में कुल 11 सीटें जीते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? नीति निर्देशक तत्व किस देश से प्रेरित हैं? भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संसद द्वारा इस संबंध में कोई विधि न बनाए जाने की स्थिति में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अन्य आयुक्तों की तुलना में विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, क्योंकि बहु-सदस्यीय आयोग होने की स्थिति में निर्णय केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सहमति से ही वैध माने जाते हैं। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी सिफारिश देते हुए यह सुझाव दिया था कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए सरकारी फंडिंग (State Funding) की व्यवस्था की जानी चाहिए, तथा निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली अपनाई जानी चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों। 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के अंतर्गत किसी उम्मीदवार को अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति है, और यदि कोई अभ्यर्थी दोनों सीटों पर विजयी हो जाता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, तथा उप-निर्वाचन का संपूर्ण खर्च उस विजयी उम्मीदवार से वसूल किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.