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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, उनकी पदावधि, शक्तियों तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, और इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई मताधिकार प्राप्त नहीं होता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, भले ही प्रधानमंत्री स्वयं इसके पक्ष में हों या लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर चुके हों।
  3. 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और विधान के प्रस्ताव संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई जानकारी मांगें तो उसे भी प्रदान करें।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य) के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा होता है। इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते (जबकि राष्ट्रपति के चुनाव में मनोनीत सदस्य भाग नहीं लेते)। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना होता है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के कर्तव्यों को परिभाषित करता है जिसके तहत संघ के प्रशासन और विधान प्रस्तावों की जानकारी राष्ट्रपति को देना प्रधानमंत्री का दायित्व है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 292 सदस्य ब्रिटिश भारत के प्रांतों से, 4 सदस्य मुख्य कमिश्नर क्षेत्रों से और 93 सदस्य रियासतें (Princely States) से होने थे, और रियासत के सदस्यों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था। 2. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने कुल 208 सीटें जीतीं, जबकि मुस्लिम लीग ने 73 सीटें प्राप्त कीं, और इस चुनाव में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) का प्रयोग किया गया था जिसके आधार पर देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक ने अपने प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष चुनाव किया था। 3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया, और सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों (अनुच्छेद 25-28) तथा उनसे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन है, और इसके तहत राज्य को किसी भी धार्मिक आचरण से जुड़ी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य किसी लौकिक क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन करने का पूर्ण अधिकार है। 2. अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने, अपने धर्म के विषयों में कार्यों का प्रबंधन करने, तथा ऐसी संपत्ति के अर्जन, स्वामित्व और प्रशासन का अधिकार प्रदान करता है, और यह अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष (Absolute) है, जिसे किसी भी विधि द्वारा राज्य के नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 27 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को ऐसे करों का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है जिनकी आय किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या पोषण के लिए विशेष रूप से व्यय की जाती है, जिसका अर्थ यह है कि राज्य द्वारा किसी धार्मिक उद्देश्य के प्रोत्साहन के लिए वसूला जाने वाला शुल्क (Fee) या कर पूरी तरह से असंवैधानिक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, अधिकारक्षेत्र और उनके नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा किसी अन्य विधिक प्रयोजन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालयों का रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारक्षेत्र की तुलना में अधिक व्यापक है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए व्यक्ति के पास कम से कम सात वर्ष का अधिवक्ता या प्लीडर के रूप में अनुभव होना आवश्यक है और वह केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में पहले से सेवारत नहीं होना चाहिए। 3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके नीचे के न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी देना शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई परामर्शदात्री या निर्णायक भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता का अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रयुक्त 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) का वाक्यांश मूल रूप से ब्रिटिश विधि से लिया गया है जो एक नकारात्मक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the Laws) अमेरिकी संविधान से लिया गया एक सकारात्मक दृष्टिकोण है जो समान परिस्थितियों में समान व्यवहार की अपेक्षा करता है। 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता के अधिकार के अधीन राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी ऐसे व्यवसाय या पेशे को चलाने के लिए तकनीकी योग्यता या व्यावसायिक अहर्ताओं को अनिवार्य बना सकता है, किंतु राज्य को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यापार या व्यवसाय का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (State Monopoly) स्वयं या किसी निगम के माध्यम से स्थापित कर सके। 3. अनुच्छेद 20 के खंड (3) के तहत प्रदान किया गया 'स्वयं के विरुद्ध अभियुक्त होने से संरक्षण' (Protection against Self-Incrimination) का अधिकार न केवल आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायालय में लागू होता है, बल्कि यह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली पूछताछ या प्रकटन के स्तर पर भी पूर्ण रूप से उपलब्ध है, तथा इसके अंतर्गत अभियुक्त को अपनी लिखावट या अंगूठे के निशान देने के लिए बाध्य किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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