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Indian Polity
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के सदस्यों की स्वतंत्रता, कार्यकाल और निष्कासन प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को केवल 'साबित कदाचार' या 'असमर्थता' के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, किंतु इसके लिए राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय की उस जाँच प्रतिवेदन की आवश्यकता अनिवार्य रूप से होती है जो अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई हो और जिसका प्रतिवेदन राष्ट्रपति के लिए सर्वथा बाध्यकारी होता है।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपनी पदावधि समाप्त होने पर भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य रोजगार (Employment) के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने की पात्रता रखता है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 318 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की संख्या तथा उनकी सेवा की शतं को विनियमित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाने के लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य होती है, किंतु यह जाँच अनुच्छेद 143 (सलाहकार क्षेत्राधिकार) के अधीन नहीं, बल्कि अनुच्छेद 317(1) में विहित विशिष्ट प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को भेजे जाने पर की जाती है, और सर्वोच्च न्यायालय का प्रतिवेदन राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होता है। कथन 2 सत्य है; संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्य पुनः नियुक्ति के पात्र नहीं होते, परंतु SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है। कथन 3 सत्य है, अनुच्छेद 318 के तहत UPSC के सदस्यों/कर्मचारियों की सेवा शर्तें निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास और SPSC के लिए राज्यपाल के पास होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों और 'अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रदत्त अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता के अधीन राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आर्थिक, वित्तीय, राजनैतिक या किसी अन्य लौकिक क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन कर सकता है और सामाजिक कल्याण या सुधार के लिए हिन्दुओं की धार्मिक संस्थाओं को सभी वर्गों के हिंदुओं के लिए खोलने का उपबंध कर सकता है, जिसमें सिख धर्म के कृपण धारण करने और लेकर चलने का अधिकार भी स्पष्ट रूप से शामिल है।
2. अनुच्छेद 29 के खंड (1) के अनुसार भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार है, तथा इस अनुच्छेद के अंतर्गत यह संरक्षण केवल 'धार्मिक अल्पसंख्यकों' तक ही सीमित है, भाषाई अल्पसंख्यकों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
3. अनुच्छेद 30 के अधीन सभी अल्पसंख्यकों (चाहे वे धर्म पर आधारित हों या भाषा पर) को अपनी पसंद की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अधिकार है, और राज्य जब ऐसी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को सहायता देने में भेदभाव नहीं करेगा, तब यदि राज्य किसी संस्था का अधिग्रहण करना चाहे जो अल्पसंख्यकों द्वारा प्रबंधित है, तो वह ऐसे नियम या कानून नहीं बना सकता जिससे उस संस्था के प्रबंधन का अधिकार अनिश्चित रूप से समाप्त हो जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण अधिकार तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार राज्यपाल को उस विषय पर, जिससे संबंधित राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल किसी भी स्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, भले ही वह मामला राज्य सूची के किसी कानून के उल्लंघन से ही संबंधित क्यों न हो, क्योंकि मृत्युदंड के मामले में क्षमादान की अनन्य शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनरुद्धार होने पर छह सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है, और यदि विधानमंडल के दोनों सदन (जहाँ द्विसदनीय व्यवस्था है) अलग-अलग तिथियों पर पुनः समवेत होते हैं, तो छह सप्ताह की यह अवधि उस तिथि से गिनी जाएगी जिस तिथि को बाद वाला सदन अपनी बैठक प्रारंभ करता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई राज्य के प्रशासन और विधान से संबंधित सभी जानकारी प्रदान करे, किंतु राज्यपाल अपनी इच्छा से मंत्रिपरिषद के किसी भी निर्णय को पुनर्विचार के लिए सीधे वापस नहीं भेज सकता जब तक कि मुख्यमंत्री स्वयं ऐसा अनुरोध न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 और पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसके मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई जो राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था और इसे ब्रिटिश कैबिनेट के नियंत्रण में रखा गया।
3. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्रों को 'ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र के अधीन भारतीय क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया, और गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या चार से घटाकर तीन कर दी गई ताकि गवर्नर-जनरल को निर्णय लेने में निर्णायक बहुमत मिल सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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जर्मन सिल्वर में निम्नलिखित में से कौन सा नहीं होता?
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राज्य के नीति निदेशक तत्व किन अनुच्छेदों में वर्णित हैं?
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