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Indian Polity
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों तथा राजभाषाओं के संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, जिसके तहत संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में संशोधनों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 राजभाषाएँ कर दिया गया है।
  2. 2. संविधान की नौवीं अनुसूची को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से भूमि सुधार और जमींदारी उन्मूलन से संबंधित कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाना था, और केशवानंद भारती वाद (1973) के पश्चात अब इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले सभी कानूनों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि वे संविधान के मूल ढाँचे का उल्लंघन करते हैं।
  3. 3. भारत के राजनीतिक दलों (Political Parties) को राष्ट्रीय या राज्यीय दल के रूप में मान्यता प्रदान करने की शक्ति भारतीय निर्वाचन आयोग को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत प्राप्त है, तथा चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के अंतर्गत दलों को मान्यता दी जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। कथन 1 के अनुसार, संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343-351) में राजभाषा का उल्लेख है तथा आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधनों के जरिए बढ़ाकर 22 किया गया। कथन 2 सही है क्योंकि प्रथम संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई नौवीं अनुसूची के कानूनों की न्यायिक समीक्षा केशवानंद भारती मामले के बाद से मूल ढाँचे के आधार पर संभव है (आई.आर. कोएलो वाद, 2007)। कथन 3 भी सत्य है कि राजनीतिक दलों को मान्यता लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A और चुनाव चिन्ह आदेश, 1968 के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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