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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power) तथा अध्यादेश जारी करने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी पूरी तरह लागू होती है।
  2. 2. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूर्ण रूप से बाहर है, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार राष्ट्रपति या राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग करते समय अपने स्वविवेक का उपयोग कर सकते हैं, जिसके लिए मंत्रिपरिषद की सलाह की कोई अनिवार्यता नहीं होती है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जो संसद के सत्र में न होने पर लाई जाती है, और यह अध्यादेश संसद की पुनः बैठक होने के छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते इसे उससे पहले संसद द्वारा अनुमोदित न कर लिया जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले भी शामिल हैं (जबकि राज्यपाल के पास यह शक्ति नहीं होती)। कथन 2 गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने 'ईश्वर सिंह बनाम द स्टेट ऑफ पंजाब' और 'एपिरागुंती विजय कुमार मामले' सहित कई निर्णयों में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है; इसका प्रयोग मनमाने ढंग से या दुर्भावनापूर्ण तरीके से नहीं किया जा सकता, तथा राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह (सहायता और सलाह) के अनुसार ही कार्य करता है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश संसद के दोनों सदनों के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद निष्प्रभावी हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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