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Indian Polity
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भारत के राष्ट्रपति की कार्यकारी और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 77 के अनुसार भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम से की हुई अभिव्यक्त की जाएगी, और राष्ट्रपति के नाम से बनाए गए और निष्पादित आदेशों तथा अन्य उपकरणों को ऐसे नियमों द्वारा प्रमाणित किया जाएगा जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए जाएंगे, तथा इस प्रकार प्रमाणित किसी आदेश या instrument की विधि-मान्यता को इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जा सकता है कि वह राष्ट्रपति द्वारा किया गया या निष्पादित आदेश नहीं है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति को समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे, सत्र के लिए आहूत करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इसके लिए यह संवैधानिक अनिवार्यता है कि संसद के दो सत्रों के बीच की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की पहली बैठक के बीच छह मास से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
  3. 3. राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत करने की शक्ति प्राप्त है, और जब राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करने के अपने आशय की सूचना संसद को दे देता है, तब लोकसभा के विघटन के बावजूद वह संयुक्त बैठक अपनी निर्धारित तिथि पर आहूत होगी और उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 77 के अनुसार भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से हुई अभिव्यक्त की जाती है और राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों के तहत आदेशों को प्रमाणित किया जाता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 85 के अनुसार राष्ट्रपति संसद के सत्र आहूत करता है और दो सत्रों के बीच अधिकतम छह महीने का अंतराल हो सकता है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 108 के तहत एक बार राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत करने की सूचना देने के बाद लोकसभा के विघटन से संयुक्त बैठक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और वह आयोजित होती है। भारतीय राजनीति के अधिक विवरण के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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