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Indian Polity
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधियों का चयन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति (अपरिवर्तनीय एकल संक्रमणीय मत) के माध्यम से किया जाना था, जबकि देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था।
- 2. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, जिसमें संविधान सभा ने भारत के संविधान पर हस्ताक्षर किए और इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, हालांकि उन्होंने 26 जनवरी 1950 को शपथ ग्रहण की।
- 3. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके अनुसार प्रत्येक प्रांत को उसकी जनसंख्या (लगभग प्रति 10 लाख जनसंख्या पर एक सीट) के अनुपात में सीटें आवंटित की गई थीं और इसमें महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार के पृथक प्रतिनिधित्व या आरक्षित सीटों का कोई प्रावधान नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि संविधान सभा के ब्रिटिश प्रांतों के सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से एकल संक्रमणीय मत के जरिए हुआ था, तथा देशी रियासतों के सदस्यों का मनोनयन रियासतों के शासकों द्वारा किया गया था। कथन 2 भी सही है; संविधान सभा की अंतिम (12वीं) बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई थी, जिस दिन सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को देश का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया। कथन 3 गलत है क्योंकि कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत संविधान सभा में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं थीं, किंतु संविधान सभा में कुल 15 महिला सदस्य शामिल थीं और जनसंख्या के आधार पर सीटों का आवंटन (10 लाख पर 1 सीट) सही था। अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और अधीनस्थ न्यायपालिका के प्रशासनिक नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की जो शक्ति प्राप्त है, वह न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे कि साधारण विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और इस दृष्टि से उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और इसमें उच्च न्यायालय की सहमति अनिवार्य होती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों के नीचे के न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन, पदस्थापन और अनुशासनिक नियंत्रण शामिल है, पूर्णतः संबंधित राज्य सरकार (राज्यपाल) के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, स्वतंत्रता और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और उच्च न्यायालय का यह रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है।
2. अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, तथा राज्यपाल द्वारा न्यायिक सेवा के अन्य व्यक्तियों की नियुक्ति राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर (जिसमें जिला न्यायालय और उनके अधीनस्थ सभी सिविल अदालतें शामिल हैं) नियंत्रण की शक्ति, जिसमें उनकी पोस्टिंग, पदोन्नति और छुट्टियों का अनुदान शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होती है, न कि राज्य के राज्यपाल या कार्यपालिका के पास।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपने पद पर बने रहते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए यह आयु सीमा बासठ वर्ष निर्धारित की गई है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) के लिए पूर्ण रूप से पात्र होते हैं, बशर्ते कि वे संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य न हों।
3. किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति रखता है, और मूल संविधान में यह एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय बना दिया गया।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के लिए सरकारी वित्तपोषण (State Funding) की संस्तुति की थी, तथा यह भी सुझाव दिया था कि किसी भी उम्मीदवार को एक साथ दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 77 के तहत राजनीतिक दलों द्वारा अपने स्टार प्रचारकों के आवागमन और प्रचार पर किए जाने वाले व्यय को संबंधित उम्मीदवार के चुनाव खर्च की सीमा में शामिल नहीं किया जाता है, बशर्ते स्टार प्रचारक की सूची चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्धारित समयावधि के भीतर सौंपी गई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-A के अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत वर्तमान में कुल ग्यारह मूल कर्तव्य संनिहित हैं।
2. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और प्रकृति से ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है, तो संसद या राज्य विधानमंडल इन्हें लागू करने के लिए सीधे न्यायालय के माध्यम से कानूनी दंड का प्रावधान कर सकती है।
3. वर्ष 2002 में पारित 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से ग्यारहवें मूल कर्तव्य को जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रपाल्य (Ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य उस माता-पिता या संरक्षक का होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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