BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
10 views

भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की संरचना, उसकी स्वायत्तता और चुनाव सुधारों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल संविधान के अनुच्छेद 324 में यह उपबंध किया गया था कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा, जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त होंगे, जिन्हें वर्ष 1993 के एक सांविधिक संशोधन के पश्चात वैधानिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया।
  2. 2. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार वही होते हैं जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के होते हैं, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
  3. 3. चुनाव आयोग के पास आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के उल्लंघन के मामलों में राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को दंडित करने के लिए कोई प्रत्यक्ष वैधानिक शक्ति नहीं है, और आयोग मुख्य रूप से नैतिक दबाव, सार्वजनिक सेंसर या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अन्य प्रावधानों के तहत ही कार्रवाई करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान में अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को केवल एक-सदस्यीय निकाय (मुख्य चुनाव आयुक्त) के रूप में परिकल्पित किया गया था। इसे पहली बार अक्टूबर 1989 में बहु-सदस्यीय बनाया गया था, और बाद में 1993 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (सेवा शर्तें) अधिनियम के माध्यम से इसे स्थायी रूप से बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया। कथन 2 सही है; मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद के विशेष बहुमत द्वारा महाभियोग जैसी प्रक्रिया से हटाया जाता है, और संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। कथन 3 सही है; आदर्श आचार संहिता (MCC) का अपना कोई सांविधिक आधार नहीं है, इसलिए निर्वाचन आयोग सीधे तौर पर इसके उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता, बल्कि यह नैतिक अपील, स्पष्टीकरण तलब करने या अन्य मौजूदा कानूनों का सहारा लेता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (Acts) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया तथा उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, और इसी अधिनियम के तहत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) का गठन किया गया जो कंपनी के राजनीतिक मामलों और ब्रिटिश नियंत्रण की देखरेख करता था, जबकि 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' (Court of Directors) को वाणिज्यिक मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 3. चार्टर अधिनियम, 1833 ने भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी, जिसके तहत बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश की पहली बार ऐसी विधाई शक्ति का केंद्रीकरण किया गया जिसके द्वारा मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधाई शक्तियों को पूरी तरह छीन लिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक बार 'राष्ट्रपति शासन' लगाया गया? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया है, तथा दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन संबंधित राज्यों के अनुरोध पर संसद द्वारा कानून बनाकर किया जाता है, न कि राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा। 2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की शक्ति राज्यपाल के पास होती है, भले ही जाँच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती हो। 3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने पर भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अनुच्छेद 51-A क्या है? भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में पारित 'चार्टर अधिनियम, 1853' (Charter Act of 1853) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पहली बार पृथक किया गया, तथा विधान निर्माण के लिए एक अलग 'अखिल भारतीय केंद्रीय विधान परिषद' (जिसे 'भारतीय विधान परिषद' भी कहा गया) की स्थापना की गई। 2. इस अधिनियम के तहत सिविल सेवकों के चयन और भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली का आरंभ किया गया, जिसके लिए वर्ष 1854 में 'मैकाले समिति' (Macaulay Committee) की नियुक्ति की गई थी। 3. इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का भारतीय क्षेत्रों पर शासन का अधिकार निश्चित अवधि के लिए पुनः बढ़ा दिया गया, और यह स्पष्ट किया गया कि कंपनी ब्रिटिश राज की ओर से इन क्षेत्रों को अपने पास तब तक रखेगी जब तक संसद कोई अन्य नया कानून नहीं बना देती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.