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Indian Polity
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, अधिकारों और कृत्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महान्यायवादी को भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई) का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु अनुच्छेद 88 के तहत उसे संसद में मत देने का कोई अधिकार नहीं है।
  2. 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) भारत सरकार के खातों से संबंधित अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्टें सीधे संसद में प्रस्तुत करता है, जबकि राज्यों के खातों से संबंधित रिपोर्टें वह सीधे राज्य विधानसभा में पेश करता है।
  3. 3. सीएजी का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होता है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 76 और अनुच्छेद 88 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी को देश के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है और वह संसद की कार्यवाही में भाग ले सकता है, बोल सकता है, लेकिन उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है। कथन 2 गलत है: सीएजी अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्टों को सीधे संसद या विधानमंडल में प्रस्तुत नहीं करता है, बल्कि वह केंद्र की रिपोर्ट राष्ट्रपति को और राज्यों की रिपोर्ट संबंधित राज्यपाल को सौंपता है, जो उन्हें तदनुसार सदन के पटल पर रखवाते हैं। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 148 के तहत सीएजी का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होता है और उसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह महाभियोग जैसी प्रक्रिया (साबित कदाचार या असमर्थता) के आधार पर ही हटाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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