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BPSC TRE 4.0
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) की उत्पत्ति, उनके प्रवाह मार्ग और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय जलधाराओं की दिशा उत्तरी गोलार्ध में कोरियालिस बल (Coriolis force) के प्रभाव से अपनी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित हो जाती है, जिसे फेरेल का नियम कहा जाता है।
- 2. उत्तरी अटलांटिक प्रवाह (North Atlantic Drift) के प्रभाव से नॉर्वे और पश्चिमी यूरोप के उच्च अक्षांशीय तटीय बंदरगाह शीतकाल में भी जमे नहीं रहते हैं, जो इन क्षेत्रों की जलवायु को समशीतोष्ण बनाए रखने में सहायक है।
- 3. क्यूरोशियो जलधारा (Kuroshio Current) प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो जापान के पूर्वी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और इसके उत्तर की ओर बढ़ने पर यह उत्तर से आने वाली ठंडी ओसियो (Oyashio) जलधारा से मिलकर सघन कोहरे और प्लवक (Plankton) का निर्माण करती है, जिससे वहाँ विश्व का प्रमुख मत्स्यन क्षेत्र बनता है।
- 4. बेंग्युला जलधारा (Benguela Current) एक ठंडी जलधारा है जो अफ्रीकी महाद्वीप के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर बहती है और इसके प्रभाव से यहाँ 'कालाहारी मरुस्थल' के निर्माण में सहायता मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'क्यूरोशियो जलधारा' (Kuroshio Current) प्रशांत महासागर की एक **उष्ण (Warm)** जलधारा है, न कि ठंडी जलधारा। यह जापान के तटों के पास उत्तर की ओर बहती है। इसी प्रकार की अन्य परीक्षाओं और विस्तृत अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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रॉलेट एक्ट, खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के कालक्रम एवं उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित 'रॉलेट एक्ट' (आधिकारिक नाम: क्रांतिकारी और अराजक अपराध अधिनियम) के तहत ब्रिटिश सरकार को बिना किसी वारंट के किसी भी व्यक्ति को संदिग्ध आधार पर गिरफ्तार करने और दो साल तक बिना मुकदमा चलाए जेल में रखने का असीमित अधिकार मिल गया था।
2. नवंबर 1919 में दिल्ली में आयोजित 'अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन' की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी ने तुर्की के खलीफा के अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया था।
3. सितंबर 1920 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का सी.आर. दास (चित्तरंजन दास) ने खुलकर समर्थन किया था तथा इसके मुख्य उद्देश्यों में 'स्वराज्य' की प्राप्ति को शामिल किया गया था।
4. चौरी-चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के पश्चात महात्मा गांधी द्वारा 12 फरवरी 1922 को बारदोली प्रस्ताव के माध्यम से असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लिए जाने के निर्णय से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
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1857 के विद्रोह के दौरान बिहार के किस जिले में 'विद्रोही सरकार' का गठन किया गया था?
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