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BPSC TRE 4.0
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ किए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) को व्यापक जनसमर्थन मिला, जिसके पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा आंदोलनों को कुचलने के लिए दमनकारी नीतियां अपनाई गईं और इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) में भाग लिया था।
  2. 2. मार्च 1931 में संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने उन राजनीतिक बंदियों को रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का आरोप नहीं था, तथा समुद्र तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपने घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की छूट दी गई, किंतु कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करने की शर्त को स्वीकार किया।
  3. 3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न तीव्र मतभेदों और गतिरोध के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
  4. 4. वर्ष 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'साम्प्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के तहत दलितों (अछूतों) को भी पृथक् निर्वाचन मंडल प्रदान किए जाने के विरोध में, महात्मा गांधी ने येरवडा सेंट्रल जेल में आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप डॉ. बी. आर. अंबेडकर और गांधी जी के बीच ऐतिहासिक 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए गए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वर्ष 1930 में आयोजित **प्रथम गोलमेज सम्मेलन का पूर्ण बहिष्कार** किया था, क्योंकि उस समय कांग्रेस के अधिकांश शीर्ष नेता और महात्मा गांधी सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में थे। कांग्रेस ने केवल द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया था। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत अहिंसक राजनीतिक बंदियों की रिहाई और घरेलू उपयोग हेतु नमक बनाने की अनुमति दी गई। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गांधीजी शामिल हुए थे, और 1932 के पूना पैक्ट के माध्यम से दलितों के लिए पृथक् निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन में आरक्षित सीटें तय की गईं। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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