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BPSC TRE 4.0
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असहयोग आंदोलन (1920-22) के स्थगन और उसके उपरांत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उत्पन्न हुए वैचारिक व राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद महात्मा गांधी द्वारा अचानक असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने के निर्णय से आहत होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य परिषदों के भीतर प्रवेश करके सरकार की नीतियों में बाधा डालना और 'असहयोग के भीतर सहयोग' की रणनीति अपनाना था।
- 2. वर्ष 1924 में आयोजित कांग्रेस के बेलगाम अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता एकमात्र बार महात्मा गांधी ने की थी, में गांधी-दास समझौते (Gandhi-Das Pact) को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया, जिसके तहत स्वराज पार्टी को कांग्रेस के राजनीतिक विंग के रूप में विधायी निकायों में भाग लेने की आधिकारिक स्वीकृति मिल गई थी।
- 3. असहयोग आंदोलन के स्थगन के पश्चात उत्पन्न वैचारिक शून्यता के माहौल में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का पुनरुत्थान हुआ, जिसके अंतर्गत अक्टूबर 1924 में कानपुर में सचिन्द्रनाथ सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत में 'फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया' की स्थापना करना था।
- 4. स्वराज पार्टी के विधानमंडलों के भीतर प्रवेश करने के बाद वर्ष 1925 में स्वराज पार्टी के प्रख्यात नेता विठ्ठलभाई पटेल को केंद्रीय विधान सभा (Central Legislative Assembly) का अध्यक्ष (Speaker) निर्विरोध चुन लिया गया था, जो कि ब्रिटिश भारत में किसी भी भारतीय द्वारा प्राप्त की जाने वाली एक बड़ी विधायी और राजनीतिक उपलब्धि थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद कांग्रेस में 'परिवर्तनवादियों' (चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू) और 'अपरिवर्तनवादियों' (राजगोपालाचारी, वल्लभभाई पटेल आदि) के बीच मतभेद उभरे, जिसके परिणामस्वरूप स्वराज पार्टी का गठन हुआ। 1924 के बेलगाम अधिवेशन में गांधी-दास समझौते के तहत स्वराजियों को कांग्रेस के नाम पर चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। कानपुर में HRA की स्थापना हुई और विठ्ठलभाई पटेल केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष चुने गए। ऐसे ही और महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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अभिकथन (A): पहाड़ी ढलानों पर फसलें पाले के प्रति कम संवेदनशील होती हैं। कारण (R): रात में गर्म हवा नीचे आकर घाटियों में जमा हो जाती है।
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बिहार की निम्नलिखित सिंचाई एवं नदी घाटी परियोजनाओं पर विचार कीजिए:
1. बागमती परियोजना के अंतर्गत कटिहार और मुजफ्फरपुर जिलों में बागमती नदी के बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए ढेंग और अनुमंडल स्तर पर नहर प्रणालियों का विकास किया गया है।
2. उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना (North Koel Reservoir Project), जो मुख्य रूप से सोन नदी की सहायक नदी उत्तरी कोयल पर स्थित है, झारखंड के पलामू जिले के साथ-साथ बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है।
3. बरई जलाशय परियोजना (Barai Reservoir Project) कैमूर जिले में स्थित एक मध्यम सिंचाई परियोजना है, जो कर्मनाशा नदी बेसिन के अंतर्गत स्थानीय किसानों को मानसूनी अनिश्चितता से सुरक्षा प्रदान करती है।
4. पुनपुन बराज परियोजना का मुख्य उद्देश्य पटना और जहानाबाद जिलों में पुनपुन नदी के जल का उपयोग करके पारंपरिक आहर-पायन प्रणालियों को पुनर्जीवित करना और खरीफ फसलों के समय अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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निम्नलिखित पुस्तकों एवं उनके लेखकों के संदर्भ में कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
1. 'द मैन हू न्यू इनफिनिटी' (The Man Who Knew Infinity) — रॉबर्ट कनीगल (Robert Kanigel)
2. 'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided) — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
3. 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' — दादाभाई नौरोजी
4. 'गीता रहस्य' — महात्मा गांधी
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रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1919 में पारित रॉलेट एक्ट (अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) के विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याभास' की शुरुआत की और 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जिसे 'बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील' का कानून कहा गया।
2. वर्ष 1919 के अंत में अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में महात्मा गांधी को चुना गया था, क्योंकि वे खिलाफत के मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम एकता के एक स्वर्णिम अवसर के रूप में देख रहे थे।
3. 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन की औपचारिक शुरुआत के दिन ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का निधन हो गया, और उनके स्मरणार्थ स्थापित 'तिलक स्वराज फंड' में मात्र कुछ महीनों में एक करोड़ से अधिक रुपये जमा किए गए।
4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसा से आहत होकर महात्मा गांधी ने बारडोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया, जिसके बाद मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास ने कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' का गठन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में किसान आंदोलनों के विकास, चंपारण सत्याग्रह और स्वामी सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में हुए किसान संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ उन्होंने तीनकथा प्रणाली (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह किया था।
2. स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों, अवैध वसूली (अवाब्स) और बेदखली के खिलाफ आवाज उठाना था।
3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित 'अखिल भारतीय किसान सभा' के प्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव के रूप में एन.जी. रंगा ने कार्य किया था।
4. बकाश्त भूमि (Bakasht Land) आंदोलन, जो बिहार में किसानों द्वारा जमींदारों के खिलाफ चलाया गया था, उसका मुख्य उद्देश्य किसानों की उस जमीन पर पुनः अधिकार प्राप्त करना था जिसे जमींदारों ने लगान न चुका पाने के कारण गैर-कानूनी तरीके से छीन लिया था और जोतदारों के रूप में किसान उसी भूमि पर कार्य कर रहे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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