त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
8 views
बिहार के कृषि उद्योग, व्यापार और आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिहार सरकार द्वारा राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों (Food Processing Industries) को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (खाद्य प्रसंस्करण)' के तहत निवेशकों को पूंजीगत सब्सिडी और विभिन्न कर रियायतें प्रदान की जा रही हैं, जिससे मखाना, लीची और मक्का आधारित उद्योगों का तेजी से विकास हुआ है।
- 2. राज्य में कृषि विपणन और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण हाटों को 'ई-नाम' (e-NAM) मंडियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है, तथा कृषि उपज के बेहतर भंडारण के लिए 'बिहार राज्य गोदाम विनियामक प्राधिकरण' के अंतर्गत आधुनिक साइलो (Silos) और गोदामों का निर्माण किया जा रहा है।
- 3. बिहार के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में परिवहन नेटवर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना' के माध्यम से कृषि उत्पादों को सीधे शहरी बाजारों और मुख्य आर्थिक गलियारों से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कों और पुलों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है।
- 4. राज्य में कृषि साख और संस्थागत वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता बैंकों और पैक्स (PACS) का डिजिटलीकरण किया गया है, जिसके माध्यम से किसानों को न्यूनतम ब्याज दरों पर ऋण और उर्वरक उपलब्ध कराए जाते हैं, और पैक्स को बहुउद्देशीय व्यापारिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। बिहार सरकार द्वारा राज्य में कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि विपणन (ई-नाम मंडियों और गोदामों के विकास), ग्रामीण आधारभूत संरचना (सड़क और सेतु नेटवर्क), तथा पैक्स (PACS) के डिजिटलीकरण के माध्यम से कृषि व्यापार और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा से जुड़ी संपूर्ण तैयारी और उपयोगी अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी उद्गार और भूकंपीय तरंगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम केंद्र को 'अधिकरण' (Epicentre) कहा जाता है, जो ठीक धरातल के नीचे स्थित वह बिंदु होता है जहाँ से सबसे पहले भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जबकि इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को 'फोकस' (Focus) कहा जाता है।
2. प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गमन कर सकती हैं और तरल या बाह्य क्रोड (Outer Core) में प्रवेश करते ही लुप्त हो जाती हैं।
3. विश्व के अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी और विनाशकारी भूकंपीय क्षेत्र 'प्रशांत महापरिमेखला' (Pacific Ring of Fire) के सहारे विसृत हैं, जहाँ मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) प्लेट सीमाओं और विनाशी प्लेट किनारों पर अत्यधिक टेक्टोनिक हलचलें होती हैं।
4. शील (Sill) और डाइक (Dyke) दोनों ही अंतर्वेदी आग्नेय चट्टानें हैं, जिनमें मैग्मा का ठंडा होना पृथ्वी की सतह के ऊपर होता है, जबकि बेथोलिथ (Batholith) एक विशालकाय गुंबद के आकार का अंतर्वेदी पिंड है जो मैग्मा के अत्यधिक गहराई पर ठंडा होने से बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
मानव प्रजातियों (Human Races) के वर्गीकरण, उनकी शारीरिक विशेषताओं तथा ग्रिफ़िथ टेलर और हटन जैसे मानवविज्ञानियों के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रिफ़िथ टेलर के 'प्रवास-कटीबंध सिद्धांत' (Migration-Zone Theory) के अनुसार, मानव प्रजातियों का उद्गम मध्य एशिया क्षेत्र में हुआ था, और जो प्रजातियाँ सबसे पहले उत्पन्न हुईं, वे विस्थापन के कारण सबसे बाहरी क्षेत्रों (जैसे ऑस्ट्रेलिया के आदिवासियों या टसमानियाई लोगों) में धकेल दी गईं।
2. 'काकेशॉइड' (Caucasoid) प्रजाति के शारीरिक लक्षणों में आमतौर पर पतली नाक, सीधी या लहरदार बाल संरचना, और हल्के रंग की त्वचा शामिल होती है, और इस प्रजाति का मूल विस्तार मुख्य रूप से यूरोप, मध्य पूर्व और भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों तक पाया जाता है।
3. मंगोलॉइड (Mongoloid) प्रजाति के लोगों की एक प्रमुख शारीरिक विशेषता उनकी पलकों पर 'एपिकैंथिक फोल्ड' (Epicanthic fold) का पाया जाना है, जिसके कारण उनकी आँखें तिरछी या मुड़ी हुई प्रतीत होती हैं, और यह विशेषता मुख्य रूप से एशियाई महाद्वीप के मूल निवासियों में मिलती है।
4. मानव प्रजातियों के वर्गीकरण में 'रक्त समूह' (Blood Groups - ABO System) को एक सटीक आनुवंशिक आधार माना जाता है, क्योंकि शारीरिक बाहरी लक्षण (जैसे त्वचा का रंग और बालों की बनावट) पर्यावरणीय दशाओं और जलवायु से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि आनुवंशिक रक्त कारक पर्यावरण से अपरिवर्तित रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों, महाजनपदों, दार्शनिक प्रणालियों तथा साहित्यिक स्रोतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर वैदिक काल में प्रयुक्त 'शतमान' (Shatamana) और 'निष्का' (Nishka) प्रारंभिक भारतीय इतिहास में विनिमय के साधन या माप के रूप में प्रयुक्त होने वाली धातु की मुद्राएँ या इकाइयाँ थीं, जिनका उल्लेख ब्राह्मण ग्रंथों और उपनिषदों में मिलता है।
2. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में से 'वज्जी' (Vajjian Confederacy) एक राजतंत्रात्मक प्रणाली पर आधारित महाजनपद था, जिसकी राजधानी वैशाली थी और यह बुद्धकालीन समय का सबसे शक्तिशाली राजतंत्र था।
3. जैन दर्शन के अनुसार, 'स्याद्वाद' (Syadvada) या 'सप्तभंगी नय' का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और प्रत्येक वस्तु के अनेक पहलू (अनेककांतवाद) होते हैं, जिसे पूर्ण रूप से एक ही दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता।
4. संगम साहित्य के अंतर्गत रचित 'तोलकाप्पियम' (Tolkappiyam) तमिल व्याकरण और काव्यशास्त्र का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसकी रचना तोलकाप्पियार द्वारा की गई थी और यह प्राचीन दक्षिण भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का विस्तृत विवरण देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
प्रकाश के व्यतिकरण (Interference of Light) और विवर्तन (Diffraction) की परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यंग के द्वि-झिरी प्रयोग (Young's Double-Slit Experiment) में प्राप्त होने वाली व्यतिकरण फ्रिंजों (Fringes) की चौड़ाई समान होती है, जबकि एकल-झिरी विवर्तन पैटर्न में केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum) को छोड़कर अन्य सभी उच्चिष्ठों की चौड़ाई असमान होती है।
2. व्यतिकरण पैटर्न में सभी दीप्त फ्रिंजों (Bright Fringes) की तीव्रता एकसमान होती है, जबकि विवर्तन पैटर्न में उच्चिष्ठों की तीव्रता केंद्रीय उच्चिष्ठ से दूर जाने पर लगातार घटती जाती है।
3. प्रकाश का विवर्तन तरंगों के प्रकाशिक मार्ग में किसी तीक्ष्ण अवरोध या द्वारक के किनारों से मुड़ने की परिघटना है, जो केवल तभी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है जब अवरोध या द्वारक का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) की तुलना में बहुत बड़ा हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत बल, गति, और ऊर्जा के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर एकसमान चाल से गति करती है, तो उस पर कार्य करने वाला अभिकेंद्र बल (Centripetal Force) वस्तु द्वारा तय किए गए वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है, किंतु यह बल वस्तु द्वारा किया गया कार्य शून्य (Zero Work) होता है क्योंकि विस्थापन की दिशा हमेशा अभिकेंद्र बल के लंबवत होती है।
2. प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic Collision) के मामले में न केवल रैखिक संवेग (Linear Momentum) संरक्षित रहता है, बल्कि कुल गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) भी पूर्ण रूप से संरक्षित रहती है, और इसमें प्रयुक्त प्रत्यास्थता गुणांक (Coefficient of Restitution, e) का मान ठीक शून्य होता है।
3. किसी वस्तु का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) केवल उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है, तथा घूर्णन अक्ष (Axis of Rotation) की स्थिति बदलने पर भी वस्तु के जड़त्व आघूर्ण के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
4. सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) करने वाले किसी कण की कुल ऊर्जा उसके विस्थापन के साथ लगातार बदलती रहती है, तथा जब कण अपने माध्य स्थिति (Mean Position) पर होता है, तब उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम और गतिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.