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BPSC TRE 4.0
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रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मार्च 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा पारित 'रॉलेट एक्ट' (अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) का मुख्य उद्देश्य बिना किसी वारंट के अनिश्चितकालीन नजरबंदी और प्रेस पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना था, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याग्रह' के तहत 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल और 'अपमान दिवस' के रूप में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।
- 2. खिलाफत आंदोलन की शुरुआत तुर्की के खलीफा के पद को समाप्त करने और उसके साम्राज्य के विघटन के विरोध में भारत में अली बंधुओं (मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली), मौलाना आजाद तथा हसरत मोहानी के नेतृत्व में की गई थी, तथा नवंबर 1919 में दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष पद पर महात्मा गांधी को चुना गया था।
- 3. सितंबर 1920 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ, जिसमें पंजाब और खिलाफत के अन्याय के निवारण के साथ-साथ 'स्वराज' की प्राप्ति को मुख्य लक्ष्य बनाया गया था, तथा चौरी-चौरा की हिंसा (फरवरी 1922) के बाद बारदोली में कांग्रेस कार्य समिति ने इस आंदोलन को औपचारिक रूप से स्थगित कर दिया था।
- 4. असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में राजेन्द्र प्रसाद, मज़हरुल हक, और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे प्रमुख नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई, तथा मज़हरुल हक ने पटना के करीब सदाकत आश्रम की स्थापना की और 'द मदरलैंड' नामक राष्ट्रवादी अखबार निकाला, जबकि असहयोग के दौरान ही नेशनल कॉलेज और बिहार विद्यापीठ की स्थापना की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। रॉलेट एक्ट के दमनकारी प्रावधानों के विरोध में पूरे देश में आक्रोश फैल गया था, जिसके परिणामस्वरुप जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी हृदयविदारक घटना घटी। खिलाफत और असहयोग आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन और अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत घर्षण बल (Friction Force), जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) और संरक्षी बलों (Conservative Forces) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. घर्षण बल एक असंरक्षी बल (Non-conservative force) है, जिसके द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है, और इस बल के विरुद्ध किया गया कार्य ऊष्मा ऊर्जा के रूप में क्षय (Dissipation) हो जाता है, जिससे किसी बंद लूप में कुल कार्य शून्य नहीं होता है।
2. किसी दृढ़ वस्तु का जड़त्व आघूर्ण वस्तु के द्रव्यमान और घूर्णन अक्ष से उसके कणों की लंबवत दूरियों के वर्ग का गुणनफल होता है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु का द्रव्यमान अक्ष के चारों ओर किस प्रकार वितरित है, न कि इस बात पर कि वस्तु का कोणीय वेग कितना है।
3. गुरुत्वाकर्षण बल और स्थिरवैद्युत बल दोनों ही संरक्षी बल (Conservative forces) हैं, क्योंकि इन बलों के अंतर्गत किसी वस्तु को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य पथ की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है।
4. यदि किसी समतल सतह पर लुढ़कते हुए एक ठोस गोले (Solid Sphere) और एक खोखले गोले (Hollow Sphere) का द्रव्यमान और त्रिज्या समान हों, और दोनों को किसी नत तल (Inclined Plane) से बिना फिसले नीचे लुढ़काया जाए, तो खोखला गोला तली पर पहले पहुँचेगा क्योंकि उसका जड़त्व आघूर्ण ठोस गोले की तुलना में कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य है-
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जलियावाला बाग हत्याकांड किस वर्ष हुआ था?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में डिजिटल शासन को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता तथा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए प्रमुख डिजिटल पोर्टलों एवं पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बिहार ई-गवर्नेंस पोर्टल' और 'राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग' द्वारा शुरू किए गए 'बिहार भूमि' (Bihar Bhumi) पोर्टल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी जमीन के भू-नशा, जमाबंदी पंजी और दाखिल-खारिज (Mutation) की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं तथा इसके लिए आवेदन भी कर सकते हैं।
2. शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य के विद्यालयों के सुचारू संचालन, शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी के लिए 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई है।
3. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए शुरू की गई 'ई-संजीवनी' (e-Sushrut / Telemedicine) पहल के तहत मरीजों को घर बैठे ऑनलाइन चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
4. लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (RTPS) के तहत विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र (जैसे आय, जाति, आवासीय प्रमाण पत्र) प्राप्त करने के लिए 'आरटीपीएस बिहार' पोर्टल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और अब सभी सेवाएं केवल ऑफलाइन माध्यम से ही प्रदान की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य (Longitudinal) यांत्रिक तरंगें होती हैं, जिनमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है, और ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं।
2. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता (Elasticity) के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक और उसके घनत्व (Density) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यही कारण है कि ध्वनि की चाल गैसों की तुलना में ठोस पदार्थों में अधिकतम होती है।
3. वायु में ध्वनि की चाल पर दाब (Pressure) के परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है, अर्थात् यदि किसी गैस का दाब दोगुना कर दिया जाए, तो नियत तापमान पर ध्वनि की चाल भी दोगुनी हो जाती है।
4. जब ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि माध्यम बदलने के कारण उसकी चाल में परिवर्तन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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