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BPSC TRE 4.0
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सौर मंडल और ब्रह्माण्ड की संरचना तथा खगोलीय पिंडों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हमारे सौर मंडल का अधिकांश द्रव्यमान और कोणीय संवेग सूर्य में निहित है, और सूर्य के भीतर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से 'प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला' (Proton-Proton Chain) नाभिकीय संलयन अभिक्रिया के माध्यम से होता है, जिसके अंतर्गत हाइड्रोजन के चार नाभिक मिलकर हीलियम के एक नाभिक का निर्माण करते हैं।
- 2. क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के मध्य स्थित है, जहाँ 'सीरेस' (Ceres) सबसे बड़ा बोना ग्रह (Dwarf Planet) है, तथा यह बेल्ट गुरु ग्रह के शक्तिशाली ज्वारीय बलों के कारण एक बड़े ग्रह के रूप में समेकित होने से वंचित रह गई।
- 3. ओर्ट क्लाउड (Oort Cloud), जो सौर मंडल की सबसे बाहरी सीमा पर स्थित बर्फीले खगोलीय पिंडों का एक विशाल गोलाकार आवरण है, दीर्घकालिक धूमकेतुओं (Long-period Comets) का मुख्य उद्गम स्थल माना जाता है, और यह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित है।
- 4. हबल स्पेस टेलीस्कोप और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के डेटा के अनुसार, ब्रह्माण्ड का विस्तार (Expansion of the Universe) स्थिर गति से हो रहा है, जिसका मुख्य कारण 'डार्क मैटर' (Dark Matter) का आकर्षक बल है, जो आकाशगंगाओं को एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। सूर्य में ऊर्जा उत्पादन का मुख्य साधन हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन (Proton-Proton Chain) है। क्षुद्रग्रह बेल्ट मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित है और सीरेस इसका सबसे बड़ा बोना ग्रह है। ओर्ट क्लाउड दीर्घकालिक धूमकेतुओं का उद्गम स्थल है। किंतु, कथन 4 असत्य है क्योंकि ब्रह्माण्ड का विस्तार त्वरित गति (Accelerated Expansion) से हो रहा है, और इस त्वरित विस्तार के लिए 'डार्क एनर्जी' (Dark Energy) उत्तरदायी है, न कि डार्क मैटर (जो कि गुरुत्वाकर्षण आकर्षण पैदा करता है)। ऐसी उच्च स्तरीय विषय-सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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पादप आकारिकी और पौधों में जनन (Plant Morphology and Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूसला जड़ (Taproot) तंत्र मुख्य रूप से द्विबीजपत्री (Dicots) पौधों में पाया जाता है जो मूलांकुर (Radicle) से विकसित होता है, जबकि अपस्थानिक जड़ें (Adventitious Roots) मूलांकुर के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य भाग से उत्पन्न होती हैं।
2. आवृत्तबीजी (Angiosperms) पौधों में 'दोहरा निषेचन' (Double Fertilization) की प्रक्रिया के दौरान एक नर युग्मक अंड कोशिका (Egg cell) से संलयन कर द्विगुणित युग्मज (Zygote) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयन कर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) का निर्माण करता है।
3. पुष्प का 'पुंकेशर' (Stamen) मादा जनन अंग है, जिसमें परागकोष (Anther) और वर्तिकाग्र (Stigma) शामिल होते हैं, जबकि स्त्रीकेशर (Pistil) नर जनन अंग का प्रतिनिधित्व करता है।
4. अनिषेक फलन (Parthenocarpy) वह प्रक्रिया है जिसमें बिना निषेचन के ही फल का विकास हो जाता है, और इस प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले फल सामान्यतः बीज रहित होते हैं, जैसे केला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1855-56 में हुए संथाल हूल (विद्रोह) का नेतृत्व सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव ने किया था, और इस विद्रोह का मुख्य क्षेत्र दामिन-इ-कोह (राजमहल की पहाड़ियाँ) था, जहाँ संथालों ने ब्रिटिश शासन और महाजनों के शोषण के खिलाफ 'बाहरी लोगों' (दिकुओं) को भगाने का आह्वान किया था।
2. वर्ष 1899-1900 में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ 'उलगुलान' (महान हलचल) आंदोलन मुख्य रूप से 'खूंटकट्टी' (सामूहिक स्वामित्व) प्रथा की बहाली और ब्रिटिश भूमि सुधारों के नाम पर आदिवासियों की पारंपरिक भूमि व्यवस्था को समाप्त करने के षड्यंत्र के खिलाफ था।
3. ताना भगत आंदोलन, जिसकी शुरुआत वर्ष 1914 में जतरा भगत के नेतृत्व में उरांव जनजाति के बीच हुई थी, एक सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था, जिसने आगे चलकर महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार को मालगुजारी (लगान) देने से स्पष्ट मना कर दिया था।
4. मुंडा विद्रोह के परिणामस्वरुप ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1908 में 'छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम' (CNTP Act) पारित किया, जिसने मुंडाओं की खूंटकट्टी व्यवस्था को कानूनी मान्यता दी और आदिवासियों की भूमि के गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगा दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत सरकार द्वारा संचालित 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' (NSAP) और हाल ही में संशोधित प्रमुख सामाजिक कल्याणकारी नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 15 अगस्त 1995 को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित 'कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता के अधिकार' के निदेशक तत्वों को साकार करना है।
2. NSAP के अंतर्गत वर्तमान में पाँच उप-योजनाएं शामिल हैं, जिनमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS), राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS), राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (IGNDPS), राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS) और अन्नपूर्णा योजना शामिल हैं।
3. 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के प्रथम चरण के तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन बसर करने वाली महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए थे, और इसके दूसरे चरण (Ujjwala 2.0) में प्रवासियों को पहचान पत्र की अनिवार्यता से छूट देते हुए केवल स्व-घोषणा के आधार पर कनेक्शन देने का प्रावधान किया गया।
4. 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है जिसके तहत देश के सभी किसान परिवारों को उनकी भूमि के आकार के बावजूद प्रतिवर्ष 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मौर्य कालीन प्रशासन और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (प्रकृति) का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है, जिसमें 'स्वामी' (राजा) को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, और प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी जिसके प्रमुख को 'ग्रामिक' कहा जाता था।
2. मौर्य काल में भू-राजस्व की सामान्य दर उपज का 1/6 भाग थी, जिसे 'भाग' कहा जाता था, जबकि आपातकालीन स्थिति में राजा द्वारा लिए जाने वाले कर को 'प्राण' या 'प्रणय' कहा जाता था।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, और प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो उद्योग, विदेशी नागरिकों की देखरेख, जन्म-मरण पंजीकरण और व्यापार जैसे मामलों को संभालते थे।
4. मौर्य प्रशासन में मुद्रा का नियंत्रण करने वाले अधिकारी को 'लक्षणाध्यक्ष' कहा जाता था, जबकि टकसाल के प्रधान अधिकारी को 'रूपदर्शक' कहा जाता था जो सिक्कों की शुद्धता की जाँच करता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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आर्थिक गतिविधियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
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