त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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भौतिकी के विविध अनुप्रयोगात्मक सिद्धांतों और रोजमर्रा की घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी चलती हुई बस में अचानक ब्रेक लगाया जाता है, तो यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं, जो मुख्य रूप से न्यूटन के गति के प्रथम नियम (जड़त्व का नियम) का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
- 2. बादलों का आकाश में तैरना या कोहरे की बूंदों का हवा में निलंबित रहना 'स्टोक्स के नियम' (Stokes' Law) पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी श्यान द्रव में गिरने वाली छोटी गोलीय वस्तु का सीमांत वेग (Terminal Velocity) उसकी त्रिज्या के वर्ग के अनुपाती होता है।
- 3. जब कोई व्यक्ति समुद्र के किनारे से गहरे पानी में तैरने का प्रयास करता है, तो उसे कम तैरने में कठिनाई होती है क्योंकि स्वच्छ जल का घनत्व समुद्री जल के घनत्व से अधिक होता है, जिससे उत्प्लावक बल (Buoyant Force) बढ़ जाता है।
- 4. प्रेशर कुकर के अंदर दाब बढ़ने से जल का क्वथनांक (Boiling Point) बढ़ जाता है, जिसके कारण उच्च तापमान पर भोजन जल्दी पक जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। बस में अचानक ब्रेक लगने पर यात्री का शरीर जड़त्व के कारण गति की अवस्था में बने रहना चाहता है (न्यूटन का प्रथम नियम)। स्टोक्स के नियम के अनुसार सीमांत वेग त्रिज्या के वर्ग के अनुपाती होता है जिससे छोटे कण हवा में तैरते प्रतीत होते हैं। प्रेशर कुकर में दाब बढ़ने से क्वथनांक बढ़ जाता है, जिससे खाना जल्दी पकता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि समुद्री जल का घनत्व स्वच्छ जल की तुलना में अधिक होता है (लवणता के कारण), न कि कम। अधिक घनत्व के कारण समुद्री जल में उत्प्लावक बल अधिक मिलता है। अपनी परीक्षा की तैयारी को और मजबूत करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जाएं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) की विधायी शक्तियों एवं प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान (Vote) करने का अधिकार नहीं है।
2. अनुच्छेद 88 के प्रावधानों के अंतर्गत महान्यायवादी को संसद के सदनों की किसी भी समिति का सदस्य बनाया जा सकता है और उसे उस समिति की बैठकों में भी बोलने तथा विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होता है, बशर्ते उसे समिति में भी मताधिकार प्राप्त नहीं होता।
3. लोकसभा और राज्यसभा के सदनों की बैठकों में कोरम (गणपूर्ति) सदन की कुल सदस्य संख्या का दसवाँ हिस्सा (1/10th) होता है, और यदि किसी सदन की बैठक में कोरम पूरा नहीं है, तो पीठासीन अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह सदन को स्थगित कर दे या बैठक को तब तक के लिए रोक दे जब तक कोरम पूरा न हो जाए।
4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकार या संशोधित कर सकती है तथा अधिकतम 30 दिनों की अवधि तक अपने पास रोक सकती है, जिसके पश्चात राज्यसभा की सहमति के बिना भी वह दोनों सदनों से पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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