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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और इस बैठक में वरिष्ठता के आधार पर डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जो कि फ्रांसीसी पद्धति पर आधारित था।
  2. 2. उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution), जिसे 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, को सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया, और यही प्रस्ताव आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।
  3. 3. संविधान निर्माण के कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए संविधान सभा द्वारा विभिन्न समितियों का गठन किया गया था, जिसमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य शामिल थे।
  4. 4. भारत के विभाजन के पश्चात 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947' के पारित होने के बाद संविधान सभा एक पूर्णतः संप्रभु निकाय बन गई, और जब यह संविधान सभा एक संविधान निर्मात्री निकाय के रूप में बैठती थी, तब इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे, किंतु जब यह देश की विधायिका (संसद) के रूप में कार्य करती थी, तब इसकी अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर (G.V. Mavalankar) द्वारा की जाती थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के अंतर्गत किया गया था। 9 दिसंबर 1946 को इसकी पहली बैठक में फ्रांस की परंपरा का अनुसरण करते हुए सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' को 22 जनवरी 1947 को अपनाया गया। प्रारूप समिति (स्थापना 29 अगस्त 1947) में डॉ. अम्बेडकर सहित 7 सदस्य थे। 1947 के अधिनियम के बाद संविधान सभा दो अलग-अलग भूमिकाओं (संविधान निर्माण और देश की अंतरिम संसद) में कार्य करती थी, जिसके अध्यक्ष क्रमशः डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जी.वी. मावलंकर होते थे। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पोर्टल पर विजिट करें।
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