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BPSC TRE 4.0
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बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा कृषकों पर किए जा रहे अन्यायों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ना और बेदखली के अधिकारों का विरोध करना था।
- 2. वर्ष 1919-20 के दौरान मधुबनी और दरभंगा क्षेत्र में स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में किसानों ने जमींदारों के अवैध उत्पीड़न, बेगार प्रथा और गो-चर भूमि पर कब्ज़े के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था।
- 3. बकाश्त भूमि की वापसी के लिए चलाए गए संघर्ष के दौरान कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बड़हिया टाल क्षेत्र में एक शक्तिशाली किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें किसानों ने 'न लगान देंगे, न बेगार करेंगे' का नारा दिया था।
- 4. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आयोजित एक बैठक के दौरान 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' के बैनर तले स्वामी सहजानंद सरस्वती की अध्यक्षता में 'अखिल भारतीय किसान समिति' की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की ताकि किसानों को जमींदारी शोषण से बचाया जा सके। स्वामी विद्यानंद ने 1919-20 में दरभंगा और मधुबनी क्षेत्र में किसानों को संगठित किया। कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बड़हिया टाल में बकाश्त भूमि के लिए 'न लगान देंगे, न बेगार करेंगे' आंदोलन का नेतृत्व किया। 1934 में पटना में हुई बैठक के बाद 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ। ऐसी और महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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ध्वनि तरंगों की प्रकृति, संचरण और विभिन्न माध्यमों में इनकी चाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य (Longitudinal) यांत्रिक तरंगें होती हैं, जिनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर कंपन करते हैं, तथा गैसों में ध्वनि का संचरण संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) के क्रमिक रूपों में होता है।
2. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल उस माध्यम की प्रत्यास्थता (Elasticity) और घनत्व (Density) पर निर्भर करती है, जिसके कारण ध्वनि की चाल लोहे (ठोस) में सर्वाधिक, जल (द्रव) में उससे कम, और वायु (गैस) में सबसे कम होती है।
3. हवा में ध्वनि की चाल पर दाब (Pressure) के परिवर्तन का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, अर्थात यदि वायुमंडल का दाब दोगुना कर दिया जाए, तो नियत तापमान पर ध्वनि की चाल भी दोगुनी हो जाती है।
4. आर्द्र वायु (Humid Air) का घनत्व शुष्क वायु (Dry Air) की तुलना में कम होता है, यही कारण है कि आर्द्रता बढ़ने पर वायु में ध्वनि की चाल बढ़ जाती है और बरसात के दिनों में सीटी की आवाज दूर तक सुनाई देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार राज्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं, विशेष रूप से बाढ़ और सूखे की विभीषिका तथा उनके प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर बिहार की नदियाँ (जैसे कोसी, गंडक, बागमती और कमला) अपने ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण अत्यधिक मात्रा में गाद (Silt) का निक्षेपण करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप नदी के तल उथले हो जाते हैं और निचले मैदानी इलाकों में अचानक विनाशकारी बाढ़ आती है।
2. बिहार के दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी भाग (जैसे औरंगाबाद, गया, नवादा और रोहतास) मॉसून की अनिश्चितता और वर्षा की अल्पता के कारण अक्सर सूखे (Drought) की चपेट में रहते हैं, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' योजना के तहत जल संचयन और चेक डैम के निर्माण पर बल दिया जा रहा है।
3. राज्य में आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए 'बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (BSSDMA) का गठन किया गया है, जो आपदा पूर्व तैयारी, समुदाय आधारित प्रशिक्षण और राहत कार्यों के संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
4. भूकंपीय संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से बिहार का संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र समान रूप से जोन-V के अंतर्गत आता है, जिसका अर्थ है कि राज्य के सभी जिले भूकंप के अत्यधिक उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में स्थित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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