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BPSC TRE 4.0
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भारत में अंतरिक्ष विज्ञान, प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी और रक्षा अनुसंधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत के भारी उपग्रह प्रक्षेपण यान 'LVM3' (Launch Vehicle Mark-3) में क्रायोजेनिक ऊपरी चरण के रूप में 'CE-20' इंजन का उपयोग किया जाता है, जो पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित भारत का पहला क्रायोजेनिक इंजन है।
  2. 2. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित 'पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान स्वायत्त संरेखण लैंडिंग प्रयोग' (RLV-LEX) के तहत अंतरिक्ष यान को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वदेशी तकनीक से रनवे पर पूरी तरह स्वचालित लैंडिंग कराने में सफलता प्राप्त हुई है।
  3. 3. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित 'अग्नि-5' एक अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जो ठोस ईंधन (Solid Propellant) पर आधारित है और इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है, तथा इसमें एमआईआरवी (MIRV) तकनीक का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।
  4. 4. भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 75 (Project 75) के तहत कलवरी श्रेणी की सभी छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण फ्रांस के नवल ग्रुप के सहयोग से मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में पूरी तरह से किया जा चुका है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) के दृष्टिकोण से पूर्णतः सत्य हैं। LVM3 में प्रयुक्त CE-20 भारत का पहला स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन है; RLV-LEX का सफल परीक्षण स्वचालित लैंडिंग तकनीक को दर्शाता है; अग्नि-5 एक ठोस ईंधन आधारित एमआईआरवी-सक्षम अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल है; और प्रोजेक्ट 75 के तहत छह कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण मझगांव डॉक में किया गया है। ऐसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी प्रश्नों का गहन अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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