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BPSC TRE 4.0
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मानव प्रजातियों (Human Races) के वर्गीकरण और उनकी शारीरिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ग्रिफ़िथ टेलर और ब्लूमन्बाख (Blumenbach) जैसे मानवविज्ञानियों ने त्वचा के रंग, बालों की बनावट, और कपाल सूचकांक (Cephalic Index) को मानव प्रजातियों के वर्गीकरण का मुख्य आधार बनाया है।
- 2. 'काॅकेशॉइड' (Caucasoid) प्रजाति के लोगों की त्वचा का रंग सामान्यतः श्वेत से लेकर गहरा भूरा, नाक तीखी और बाल लहरदार होते हैं, और इस प्रजाति का उद्गम स्थल मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया और उत्तरी अफ्रीका माना जाता है।
- 3. 'मंगोलॉइड' (Mongoloid) प्रजाति की प्रमुख शारीरिक विशेषताओं में तिरछी आँखें, एपिकैंथिक फोल्ड (Epicanthic fold), चपटा चेहरा और सीधे, कड़े बाल शामिल हैं, जो मुख्य रूप से एशिया और अमेरिकी मूल के मूल निवासियों में पाए जाते हैं।
- 4. 'नीग्रोइड' (Negroid) प्रजाति के लोगों में बालों का प्रकार ऊनी या छल्लेदार (Woolly/Frizzly) होता है, और उनका नासिका सूचकांक (Nasal Index) बहुत कम होता है, जिसके कारण उनकी नाक अत्यधिक लंबी और पतली होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव प्रजातियों (Human Races) के वर्गीकरण के संदर्भ में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। ब्लूमन्बाख और ग्रिफ़िथ टेलर ने कपाल सूचकांक, बालों के प्रकार और त्वचा के वर्ण को वर्गीकरण का आधार बनाया था। काॅकेशॉइड और मंगोलॉइड प्रजातियों की शारीरिक विशेषताएँ और भौगोलिक विस्तार बिल्कुल सही बताए गए हैं। इसके विपरीत, कथन 4 असत्य है क्योंकि नीग्रोइड प्रजाति का 'नासिका सूचकांक' (Nasal Index) बहुत अधिक होता है, जिसके कारण उनकी नाक चपटी और चौड़ी होती है, न कि लंबी और पतली। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की संपूर्ण और उत्कृष्ट तैयारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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यूरोपीय नदियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय ने वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना और हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों तथा मूर्तिपूजा का विरोध करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने वर्ष 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी, तथा उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए जन्मजात जाति व्यवस्था और बहुदेववाद का जोरदार खंडन किया था।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से उन्होंने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, छुआछूत और अंधविश्वास का कड़ा विरोध करते हुए समाज के शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित हुआ, जिसे बाद में विलियम बेंटिंक द्वारा कानूनी मान्यता दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में राष्ट्रीय आंदोलनों की गतिशीलता के संदर्भ में 'मुस्लिम लीग' और 'होमरोल लीग आंदोलन' के बीच हुए सहयोग और ऐतिहासिक परिघटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1916 के प्रसिद्ध लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता (लखनऊ पैक्ट) संपन्न हुआ, जिसमें मुस्लिम लीग की ओर से मुख्य रूप से मोहम्मद अली जिन्ना और कांग्रेस की ओर से अंबिका चरण मजूमदार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और इसी अधिवेशन में होमरोल आंदोलन के नेताओं (बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसिड) ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई थी।
2. एनी बेसेंट द्वारा सितंबर 1916 में मद्रास में स्थापित 'ऑल इंडिया होम रूल लीग' को मुस्लिम लीग के कई प्रमुख नेताओं जैसे मौलाना आज़ाद, हसरत मोहानी और अली बंधुओं का नैतिक एवं राजनीतिक समर्थन प्राप्त हुआ था, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने इस बढ़ते हुए हिंदू-मुMuslim गठबंधन को रोकने के लिए दमनकारी नीतियां अपनाई थीं।
3. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में महाराष्ट्र और कर्नाटक क्षेत्र में शुरू की गई होमरोल लीग ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के समक्ष 'उत्तरदायी शासन' (Responsible Government) की मांग को मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1917 की मोंटग्यू घोषणा (Montagu Declaration) जारी की थी।
4. वर्ष 1916 के लखनऊ समझौते के तहत कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorate) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था, जिसे बाद में राष्ट्रवादी नेताओं जैसे मदन मोहन मालवीय और कई अन्य कांग्रेसियों द्वारा इस आधार पर तीखा विरोध किया गया कि यह भविष्य में सांप्रदायिक विभाजन को और अधिक बढ़ावा देगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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रॉलेट एक्ट, खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 2019 में पारित रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) के विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याग्रह' के लिए एक 'सत्याग्रह सभा' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बिना वारंट के गिरफ्तारी और प्रेस पर सेंसरशिप जैसे दमनकारी प्रावधानों का शांतिपूर्ण विरोध करना था।
2. खिलाफत आंदोलन के संस्थापकों में अली बंधुओं (मौलाना मोहम्मद अली और मौलाना शौकत अली) के साथ-साथ मौलाना अबुल कलाम आजाद, हसरत मोहानी और डॉ. एम.ए. अंसारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी, और अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी के प्रथम सम्मेलन की अध्यक्षता स्वयं महात्मा गांधी ने की थी।
3. कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का भारी विरोध किया गया था, क्योंकि चित्तरंजन दास और मदन मोहन मालवीय जैसे नेता परिषदों के बहिष्कार के पक्ष में नहीं थे, हालांकि नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा की हिंसक घटना (5 फरवरी 1922) के पश्चात महात्मा गांधी ने बारडोली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की, जिससे देश के कई युवा नेताओं जैसे सुभाष चंद्र बोस और चित्तरंजन दास ने इस निर्णय की गहरी आलोचना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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