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BPSC TRE 4.0
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परमाणु भौतिकी तथा आधुनिक भौतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आइंस्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण ($K_{max} = h\nu - \Phi$) के अनुसार, उत्सर्जित photoelectron की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर रैखिक रूप से निर्भर करती है, तथा यह कार्य फलन ($\Phi$) पर भी निर्भर करती है।
  2. 2. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं स्थिर कक्षाओं में परिक्रमा कर सकते हैं जिनका कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$।
  3. 3. रेडियोएक्टिव क्षय के नियमानुसार, किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) उसके क्षय नियतांक ($\lambda$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, जिसका संबंध $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  4. 4. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया में जब दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, तो द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) के कारण अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है, और सूर्य व अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत यही प्रक्रिया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

आधुनिक एवं परमाणु भौतिकी के ये सभी चारों कथन वैज्ञानिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं। प्रकाश-वैद्युत प्रभाव, बोर का परमाणु मॉडल, रेडियोएक्टिविटी का क्षय नियम और नाभिकीय संलयन आधुनिक भौतिकी के आधार स्तंभ हैं। इस प्रकार के महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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