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BPSC TRE 4.0
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढाँचे, भू-राजस्व व्यवस्था तथा सल्तनतकालीन इतिहास के विभिन्न विभागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नामक नए विभाग की स्थापना सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बकाया राजस्व की वसूली करना और लगान भ्रष्टाचार पर कड़ाई से नियंत्रण रखना था।
- 2. 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना मोहम्मद बिन तुगलक द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंधार) प्रदान करके बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना था।
- 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सर्वाधिक मात्रा में नहरों का निर्माण करवाया तथा सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए किसानों पर 'हर्ब-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) नामक कर लगाया, जो उपज का 1/10 भाग निर्धारित किया गया था।
- 4. सल्तनत काल में भू-राजस्व निर्धारण की सबसे प्राचीन और सामान्य पद्धति 'कंकूट' या 'बटाई' थी, जबकि अलाउद्दीन खिलजी ने साम्राज्य के एक बड़े हिस्से (विशेषकर दोआब क्षेत्र) में 'विश्वा' पद्धति के आधार पर पैमाइश (मसाहत) को अनिवार्य कर भू-राजस्व सीधे राज्य द्वारा वसूले जाने की व्यवस्था की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन मध्यकालीन भारतीय इतिहास (दिल्ली सल्तनत) के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व भ्रष्टाचार रोकने के लिए 'दीवान-ए-मुस्तखराज' की स्थापना की और मसाहत (पैमाइश) को लागू किया। मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि सुधार हेतु 'दीवान-ए-कोही' बनाया। फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई के लिए नहरें बनवाईं और 'हर्ब-ए-शर्ब' कर लगाया। इस प्रकार के उच्च स्तरीय और विश्लेषणात्मक प्रश्न बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पैटर्न के अनुसार आपकी तैयारी को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय ने वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना और हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों तथा मूर्तिपूजा का विरोध करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने वर्ष 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी, तथा उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए जन्मजात जाति व्यवस्था और बहुदेववाद का जोरदार खंडन किया था।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से उन्होंने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, छुआछूत और अंधविश्वास का कड़ा विरोध करते हुए समाज के शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित हुआ, जिसे बाद में विलियम बेंटिंक द्वारा कानूनी मान्यता दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक नाम क्या है?
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल विद्रोह (1855-56), जिसे 'हु-कूल' के नाम से भी जाना जाता है, का नेतृत्व सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव ने किया था, और यह आंदोलन मुख्य रूप से भागलपुर से राजमहल के बीच फैले 'दामिन-ए-कोह' क्षेत्र में महाजनों, पुलिस और बाहरी लोगों (दीकुओं) के उत्पीड़न के विरुद्ध था।
2. मुंडा उलगुलान (1899-1900) का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया था, जिनका मुख्य उद्देश्य 'खूंटकट्टी' (सामूहिक स्वामित्व) व्यवस्था की बहाली करना तथा ब्रिटिश राज और सामंतवाद को समाप्त कर 'बिरसा राज' की स्थापना करना था।
3. ताना भगत आंदोलन (1914), जो छोटानागपुर क्षेत्र में जतरा भगत के नेतृत्व में शुरू हुआ था, एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिसने आगे चलकर असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर स्वदेशी और कर न देने (No-tax) का समर्थन किया था।
4. खरवार आंदोलन (1874), जिसका नेतृत्व भागीरथ मांझी ने किया था, ने एकेश्वरवाद और सामाजिक सुधारों पर बल देते हुए ब्रिटिश सरकार के भू-राजस्व और बंदोबस्त नीतियों का कड़ा विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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यूकैरियोटिक कोशिका के भीतर पाए जाने वाले विभिन्न कोशिकांगों (Organelles) की संरचना, उनके अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) स्वभाव और उनमें होने वाली जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक (Chloroplast) दोनों को 'अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग' कहा जाता है क्योंकि इनमें स्वयं का वृत्ताकार डीएनए (Circular DNA), 70S प्रकार के राइबोसोम और प्रोटीन संश्लेषण करने की क्षमता पाई जाती है।
2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का निर्माण झिल्लीबद्ध सिस्टर्नी (Cisternae) के चपटे थैलों से होता है, जिसका मुख्य कार्य ग्लाइकोप्रोटीन और ग्लाइकोलिपिड का निर्माण करना (Glycosylation) तथा कोशिका का मुख्य स्रावी अंगक के रूप में कार्य करना है।
3. लाइसोसोम (Lysosome) में उच्च अम्लीय वातावरण (pH लगभग 4-5) बनाए रखने के लिए इसकी झिल्ली पर हाइड्रोजन आयन ($H^+$) पंप (ATPase) पाए जाते हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलाइटिक एन्जाइम होते हैं जो केवल क्षारीय माध्यम में ही सक्रिय होते हैं।
4. अंतःद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) का खुरदरा भाग (RER) प्रोटीन संश्लेषण और उसके परिवहन से संबंधित होता है, जबकि चिकना भाग (SER) लिपिड, स्टेरॉयड हॉर्मोन के संश्लेषण और विषहरण (Detoxification) के कार्यों में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चुम्बकत्व (Magnetism) और चुम्बकीय पदार्थों के गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Materials) वे होते हैं जिन्हें किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर वे क्षेत्र की विपरीत दिशा में बहुत कम चुम्बकीय हो जाते हैं और चुम्बकीय क्षेत्र के तीव्र भाग से कमजोर भाग की ओर प्रतिकर्षित होते हैं, जैसे बिस्मथ, तांबा और जल।
2. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Materials) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हल्के से चुम्बकीय होते हैं और चुम्बकीय क्षेत्र के कमजोर भाग से तीव्र भाग की ओर आकर्षित होते हैं, तथा ताप बढ़ाने पर इनका चुम्बकत्व क्यूरी नियम (Curie's Law) के अनुसार बढ़ता है।
3. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Materials) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में बहुत प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं और चुम्बकीय क्षेत्र हटा लेने के बाद भी अपना चुम्बकत्व बनाए रखते हैं (स्थाई चुम्बक का निर्माण), तथा एक निश्चित क्रांतिक ताप जिसे 'क्यूरी ताप' (Curie Temperature) कहते हैं, के ऊपर ये अनुचुम्बकीय पदार्थों की तरह व्यवहार करने लगते हैं।
4. पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र मुख्य रूप से पृथ्वी के क्रोड (Core) में पिघली हुई अवस्था में मौजूद लोहे और निकल जैसी भारी धातुओं के संवहन धाराओं (Convection Currents) के कारण उत्पन्न होने वाली डायनेमो प्रभाव (Dynamo Effect) पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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