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BPSC TRE 4.0
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मौर्य एवं मौर्योत्तर काल (Mauryan and Post-Mauryan Period) के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान और मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मौर्य प्रशासन में 'समान्हर्त्ता' (Samahartri) का मुख्य कार्य राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना यानी राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख होना था, जबकि 'संनिधाता' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य अधिकारी होता था।
- 2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) के शासकों ने शीशे, प्रोटीन, तांबे और कांसे के सिक्के जारी किए, तथा उन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया, जिससे सामंती प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला।
- 3. कुषाण काल (मौर्योत्तर काल) के दौरान सोने के सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन हुआ, और कुषाणों के स्वर्ण सिक्के रोमन साम्राज्य के सिक्कों की तुलना में कम शुद्धता वाले थे, जबकि गुप्त काल ने इस मामले में इन्हें पीछे छोड़ दिया।
- 4. मौर्योत्तर काल में अर्थव्यवस्था में नगरीकरण का ह्रास देखा गया, जिसके कारण बड़े व्यापारिक निगमों या श्रेणियों (Guilds) का पतन हो गया और आंतरिक तथा बाह्य व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मौर्य प्रशासन में 'समान्हर्त्ता' (राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख) और 'संनिधाता' (कोषागार का प्रमुख) महत्वपूर्ण अधिकारी थे। सातवाहन वंश के शासकों ने शीशे (Lead) के सिक्के बड़े पैमाने पर जारी किए और ब्राह्मणों/भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की शुरुआत की। अतः कथन 1 और 2 सही हैं। इसके विपरीत, कुषाणों के स्वर्ण सिक्के रोमन सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता वाले थे (कथन 3 गलत है)। मौर्योत्तर काल में नगरीकरण का ह्रास नहीं बल्कि व्यापार में भारी समृद्धि (रोमन व्यापार के कारण) और श्रेणियों का उत्थान हुआ था (कथन 4 गलत है)। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जाएँ।
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बिहार सरकार द्वारा नागरिकों को घर बैठे विभिन्न डिजिटल और प्रशासनिक सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के लिए कई पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं। इन डिजिटल पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बिहार भूमि' पोर्टल का संचालन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके माध्यम से नागरिक ऑनलाइन लगान भुगतान, दाखिल-खारिज (Mutation) के आवेदन तथा अपनी जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड (रजिस्टर-II) की प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
2. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) द्वारा संचालित 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का उद्देश्य राज्य के विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों तथा विद्यालयों के प्रभावी अनुश्रवण (Monitoring) को डिजिटल रूप से प्रबंधित करना है।
3. 'बिहार मौसम सेवा केंद्र' (BMSK) पोर्टल और मोबाइल ऐप योजना एवं विकास विभाग तथा आपदा प्रबंधन के अंतर्गत कार्य करता है, जो किसानों और आम नागरिकों को वास्तविक समय (Real-time) पर मौसम पूर्वानुमान, वज्रपात (Thunderstorm) और बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रदान करता है।
4. लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (RTPS) के अंतर्गत जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन आवेदन के लिए उपयोग किए जाने वाले 'सर्विस प्लस' (Service Plus) पोर्टल का नियंत्रण पूरी तरह से केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय के पास है, और इसमें राज्य सरकार की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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