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BPSC TRE 4.0
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भारतीय इतिहास के विविध पक्षों, पुरातात्विक साक्ष्यों, विदेशी यात्रियों के विवरण तथा ऐतिहासिक संस्थाओं और आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang), जो हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था, ने अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) में भारत की सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत विवरण देते हुए शूद्रों को कृषक के रूप में उल्लेखित किया है तथा नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में आचार्य शीलभद्र का उल्लेख किया है।
  2. 2. ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1876 में लंदन में इंडियन एसोसिएशन (Indian Association) की स्थापना सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लोकमत का संगठन करना, हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना और सिविल सेवा परीक्षाओं की आयु सीमा में किए गए कटौती का विरोध करना था।
  3. 3. प्राचीन भारतीय इतिहास में प्रयुक्त होने वाले शब्द 'हिरण्य' (Hiranya) का सामान्य अर्थ ऋग्वैदिक और उत्तर-वैदिक काल में स्वर्ण या स्वर्ण आभूषण से था, जबकि मौर्य काल में यह राजा को किसानों द्वारा नगद (Cash) रूप में दिए जाने वाला एक प्रकार का कर था।
  4. 4. वर्ष 1920 में नागपुर में आयोजित कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का अनुमोदन चित्तरंजन दास (C.R. Das) द्वारा किया गया था, जबकि इसी अधिवेशन में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन करके भाषाई आधार पर प्रांतीय कांग्रेस कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। ह्वेनसांग (यायुआन श्वांग) ने 'सी-यू-की' में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति शीलभद्र का उल्लेख किया है और शूद्रों को कृषि कार्य करते हुए बताया है। सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस ने 1876 में 'इंडियन एसोसिएशन' की स्थापना की थी, जिसने सिविल सेवा परीक्षा की आयु घटाए जाने का कड़ा विरोध किया था। 'हिरण्य' शब्द का प्रयोग प्राचीन काल में स्वर्ण और मौद्रिक कर दोनों रूपों में मिलता है। दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में सी.आर. दास ने ही असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का समर्थन/अनुमोदन किया था तथा भाषाई कांग्रेस कमेटियों के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ था। इस प्रकार की उच्च स्तरीय सामग्री और अभ्यास प्रश्नों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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