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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के आपात उपबंधों और संविधान संशोधन प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, बशर्ते आपातकाल युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो, न कि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
  2. 2. राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
  3. 3. संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368) को संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित किया जा सकता है, और इसके लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान है ताकि गतिरोध को समाप्त किया जा सके।
  4. 4. संविधान के भाग XX का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति देता है, परंतु सर्वोच्च न्यायालय के 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के निर्णय के अनुसार संसद संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) में संशोधन नहीं कर सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 358 के अनुसार जब युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया जाता है, तब अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं; किंतु सशस्त्र विद्रोह के आधार पर ऐसा नहीं होता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा का अनुमोदन संसद के दोनों सदनों द्वारा 2 माह के भीतर साधारण बहुमत से होना आवश्यक है। कथन 3 असत्य है क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में अनुच्छेद 368 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है; इसे प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। कथन 4 सत्य है क्योंकि केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह संविधान के 'मूल ढांचे' का उल्लंघन न करे। इस प्रकार के उच्च स्तरीय प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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