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BPSC TRE 4.0
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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1916 में स्थापित 'होमरोल लीग' आंदोलन और उसके समकालीन 'मुस्लिम लीग' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में स्थापित इंडियन होम रूल लीग का मुख्य कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार था, तथा इसका मुख्यालय पुणे में स्थित था, जबकि एनी बेसेंट की लीग का कार्यक्षेत्र शेष भारत था।
- 2. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए प्रसिद्ध 'लखनऊ पैक्ट' के तहत कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडलों की मांग को स्वीकार किया था, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना और बाल गंगाधर तिलक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- 3. मुस्लिम लीग के कलकत्ता अधिवेशन (1917) में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था, और लीग के कई प्रमुख नेताओं जैसे जिन्ना और मौलाना आज़ाद ने भी होमरोल लीग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
- 4. एनी बेसेंट द्वारा शुरू किए गए होमरोल आंदोलन के विरोध में नरम दल (उदारवादी) के नेताओं ने तुरंत ब्रिटिश सरकार का समर्थन करते हुए आंदोलन की कड़ी आलोचना की थी और किसी भी लीग की सदस्यता ग्रहण करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा क्रमशः अप्रैल 1916 और सितंबर 1916 में होमरोल लीग की स्थापना की गई थी। तिलक की लीग का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे शहर को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार था, जबकि बेसेंट की लीग का कार्यक्षेत्र देश का बाकी हिस्सा था। 1916 के लखनऊ समझौते में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। एनी बेसेंट की गिरफ्तारी (1917) के विरोध में मुस्लिम लीग के नेताओं ने भी खुलकर समर्थन किया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि उदारवादी नेताओं (जैसे सुरेंद्रनाथ बनर्जी, तेजबहादुर सप्रू आदि) ने होमरोल आंदोलन का समर्थन किया था और कई उदारवादी नेता बाद में एनी बेसेंट की लीग से जुड़ गए थे। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पर विजिट करें।
Related Questions
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मानव शरीर के परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) और रुधिर परिसंचरण की प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय एक पेशीय अंग है जो दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) प्रदर्शित करता है, जिसमें ऑक्सीजनित (Oxygenated) और विऑक्सीजनित (Deoxygenated) रुधिर आपस में नहीं मिलते हैं क्योंकि हृदय चार कक्षों (दो आलिंद और दो निलय) में विभाजित होता है।
2. महाधमनी (Aorta) से निकलने वाला ऑक्सीजनित रक्त सबसे पहले दाहिने आलिंद (Right Atrium) में प्रवेश करता है, और वहाँ से त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से दाहिने निलय में भेजा जाता है।
3. फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery) एकमात्र ऐसी धमनी है जो हृदय के दाहिने निलय से विऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है, ताकि उसका शुद्धिकरण (Oxygenation) हो सके।
4. रुधिर दाब (Blood Pressure) को मापने के लिए स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) का उपयोग किया जाता है, जिसमें सामान्य स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन दाब (Systolic Pressure) लगभग 120 mm Hg और अनुशिथिलन दाब (Diastolic Pressure) लगभग 80 mm Hg होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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द्वैध शासन (Diarchy) का जनक किसे माना जाता है?
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बिहार के निम्नलिखित में से किस वन्यजीव अभयारण्य या पक्षी विहार को राज्य का 'पहला सामुदायिक रिजर्व' (Community Reserve) घोषित किया गया है, जो गंगा नदी के तट पर स्थित है और कछुओं के संरक्षण के लिए विशेष रूप से जाना जाता है?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और भूकंपीय तरंगों के संचलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम बिंदु को 'फोकस' (Focus) या हाइपोसेंटर कहा जाता है, जो पृथ्वी के भीतर स्थित होता है, जबकि इसके ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु को 'अधिकरण' (Epicentre) कहा जाता है जहाँ सबसे पहले भूकंपीय तरंगें पहुँचती हैं।
2. प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं।
3. हवाई द्वीप पर पाया जाने वाला 'किलाउएआ' (Kilauea) ज्वालामुखी ढाल (Shield) ज्वालामुखी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अत्यधिक तरल और कम चिपचिपे बेसिक लावा (Basaltic lava) के शांत उद्गार से निर्मित होता है।
4. विस्फोटे उद्गारों के आधार पर 'पेलियन तुल्य' (Peléean type) ज्वालामुखी उद्गार सबसे अधिक विनाशकारी और भयंकर माने जाते हैं, जिनमें अत्यधिक गाढ़ा लावा, ज्वलनशील गैसों के बादल और पाइरोक्लास्टिक पदार्थ तीव्र गति से बाहर निकलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्वों के चक्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशीय (Unidirectional) होता है, जो सूर्य से शुरू होकर उत्पादकों, शाकाहारी जीवों और अंततः मांसाहारी जीवों से होता हुआ ऊष्मा के रूप में वायुमंडल में विसर्जित हो जाता है, और यह ऊर्जा कभी भी उल्टी दिशा में प्रवाहित नहीं होती है।
2. लिंडमैन का 'दस प्रतिशत का नियम' (Ten Percent Law) यह बताता है कि जब ऊर्जा का एक पोषण स्तर (Trophic Level) से दूसरे उच्च पोषण स्तर पर स्थानांतरण होता है, तो प्रत्येक अगले स्तर पर केवल लगभग 10% ऊर्जा ही रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित हो पाती है, जबकि शेष 90% ऊर्जा श्वसन, उपापचय और ऊष्मा के रूप में क्षس हो जाती है।
3. पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramid) में संख्या का पिरामिड और जीवभार (Biomass) का पिरामिड सदैव और सभी प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्रों में हमेशा सीधा (Upright) ही बनता है, कभी भी उल्टा नहीं हो सकता है।
4. जैव-भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycles) के अंतर्गत पोषक तत्व पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic) घटकों के बीच चक्रीय रूप से प्रवाहित होते हैं, जिसमें गैसीय चक्र (जैसे नाइट्रोजन और कार्बन चक्र) का भंडार मुख्य रूप से वायुमंडल या जलमंडल होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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