BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों तथा स्वतंत्रता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया (महाभियोग जैसी प्रक्रिया) के लिए संसद के प्रत्येक सदन द्वारा कुल सदस्यता का बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है, और यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जिसमें राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना प्रस्ताव लाया ही नहीं जा सकता।
- 2. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) न केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है, बल्कि उन सभी निकायों और प्राधिकरणों का भी लेखा-परीक्षण करता है जिन्हें सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त होती है, और वह अपनी रिपोर्ट सीधे संसद में राष्ट्रपति को सौंपता है जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाते हैं।
- 3. अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त CAG अपने पद पर छह वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक (इनमें से जो भी पहले हो) रह सकता है, और सेवानिवृत्ति के पश्चात वह भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या पद को धारण करने के लिए पूर्णतः पात्र होता है, क्योंकि संविधान इसके पुनर्नियोजन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है।
- 4. उच्चतम न्यायालय की आरंभिक (Original) अधिकारिता के अंतर्गत भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले कानूनी विवाद आते हैं, किंतु यदि कोई विवाद किसी पुरानी संधि, समझौते या कवनेंट (Covenant) से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान लागू होने से पहले किया गया था, तो उच्चतम न्यायालय की यह अधिकारिता उस पर लागू नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव (संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत द्वारा) को प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति की कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं होती है, बल्कि लोकसभा में 100 सदस्यों या राज्य सभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव अध्यक्ष/सभापति को दिया जाता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 148(4) के अनुसार, CAG सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद को धारण करने के लिए अपात्र (अयोग्य) होता है। कथन 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। इस प्रकार के उच्च स्तरीय प्रश्नों के अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जा सकते हैं।
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके परिणामस्वरूप शुरू हुए 'स्वदेशी आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक हुई और 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, बंगाली गीत 'आमार सोनार बांग्ला' गाया गया और एक-दूसरे की कलाई पर 'रक्षा बंधन' बांधकर एकता का प्रदर्शन किया गया।
3. बंगाल विभाजन के विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन का प्रसार केवल बंगाल तक ही सीमित रहा, और देश के अन्य भागों जैसे पंजाब, महाराष्ट्र और मद्रास में इस आंदोलन का कोई विशेष प्रभाव या समर्थन देखने को नहीं मिला।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वर्ष 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद्' (National Council of Education) की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा को स्वदेशी नियंत्रण के तहत प्रदान करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत प्रत्येक बीघा भूमि के तीन-बीसवें (3/20वें) हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना कानूनी रूप से बाध्यकारी था।
2. महात्मा गांधी के चंपारण आगमन से पूर्व, राजकुमार शुक्ल ने दिसंबर 1916 में आयोजित लखनऊ अधिवेशन के दौरान गांधीजी से मिलकर चंपारण के किसानों की दयनीय स्थिति का विवरण दिया था और उन्हें बिहार आने का निमंत्रण दिया था।
3. सरकार द्वारा किसानों की शिकायतों की जाँच के लिए गठित 'चंपारण कृषि समिति' (Champaran Agrarian Committee) के अध्यक्ष एफ. जी. स्लाई (F. G. Sly) थे, और इस समिति में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, जिसकी संस्तुति के आधार पर 'तीनकठिया प्रणाली' को अवैध घोषित कर समाप्त कर दिया गया।
4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से उत्साहित होकर महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में खेड़ा सत्याग्रह का नेतृत्व किया, और इस पूरे आंदोलन के दौरान बिहार के जिन स्थानीय वकीलों और बुद्धजीवियों ने गांधीजी का पूर्ण सहयोग किया उनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह और मजहरुल हक प्रमुख थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्य सभा) या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद में किसी भी विधेयक या प्रस्ताव पर मतदान (Voting) करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जो कभी विघटित नहीं होता है, और इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं, किंतु यदि कोई सदस्य उप-चुनाव के माध्यम से रिक्त सीट पर चुनकर आता है, तो उसका कार्यकाल भी शेष 6 वर्ष का ही होता है।
3. लोकसभा में किसी भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) को प्रस्तुत करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और यह प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है, राज्य सभा में नहीं।
4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और राज्य सभा को इस संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियाँ प्राप्त हैं क्योंकि वह किसी धन विधेयक को अस्वीकार या उसमें संशोधन नहीं कर सकती, बल्कि उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में मानसून के आगमन, वर्षा के स्थानिक वितरण और विभिन्न मानसूनी शाखाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य प्रवेश जून के दूसरे सप्ताह (लगभग 10 से 15 जून के मध्य) में होता है, जो मुख्य रूप से राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भागों (जैसे किशनगंज और पूर्णिया) से प्रवेश करता है।
2. राज्य में वर्षा का वितरण असमान है, जहाँ उत्तर-पूर्वी जिलों (किशनगंज, अररिया) में बंगाल की खाड़ी की शाखा के प्रभाव से सर्वाधिक वर्षा (लगभग 200 सेमी तक) दर्ज की जाती है, जबकि दक्षिण-मध्य और पश्चिमी जिलों (जैसे गया, औरंगाबाद और रोहतास) में वर्षा की मात्रा अपेक्षाकृत कम (लगभग 100 से 120 सेमी) होती है।
3. बिहार में शीतकाल के दौरान होने वाली वर्षा का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से उठने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं, जो राज्य के दक्षिणी पठारी भागों में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि का मुख्य कारक बनते हैं।
4. मानसून की वापसी (Retreating Monsoon) के समय अक्टूबर और नवंबर के महीनों में बिहार के मैदानी भागों में कभी-कभी चक्रवातीय प्रभावों (जैसे बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफानों) के कारण हल्की से मध्यम मानसूनी वर्षा होती है, जो रबी फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल होती है।
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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