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BPSC TRE 4.0
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बिहार में मानसून के आगमन, वर्षा के स्थानिक वितरण और विभिन्न मानसूनी शाखाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य प्रवेश जून के दूसरे सप्ताह (लगभग 10 से 15 जून के मध्य) में होता है, जो मुख्य रूप से राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भागों (जैसे किशनगंज और पूर्णिया) से प्रवेश करता है।
  2. 2. राज्य में वर्षा का वितरण असमान है, जहाँ उत्तर-पूर्वी जिलों (किशनगंज, अररिया) में बंगाल की खाड़ी की शाखा के प्रभाव से सर्वाधिक वर्षा (लगभग 200 सेमी तक) दर्ज की जाती है, जबकि दक्षिण-मध्य और पश्चिमी जिलों (जैसे गया, औरंगाबाद और रोहतास) में वर्षा की मात्रा अपेक्षाकृत कम (लगभग 100 से 120 सेमी) होती है।
  3. 3. बिहार में शीतकाल के दौरान होने वाली वर्षा का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से उठने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं, जो राज्य के दक्षिणी पठारी भागों में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि का मुख्य कारक बनते हैं।
  4. 4. मानसून की वापसी (Retreating Monsoon) के समय अक्टूबर और नवंबर के महीनों में बिहार के मैदानी भागों में कभी-कभी चक्रवातीय प्रभावों (जैसे बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफानों) के कारण हल्की से मध्यम मानसूनी वर्षा होती है, जो रबी फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

बिहार में मानसून और वर्षा के वितरण के संदर्भ में कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करता है। उत्तर-पूर्वी भागों (विशेषकर किशनगंज) में बंगाल की खाड़ी की शाखा से सर्वाधिक वर्षा होती है। मानसून की वापसी (अक्टूबर-नवंबर) के समय होने वाली वर्षा रबी फसलों के लिए लाभप्रद होती है। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि शीतकाल में बिहार में होने वाली वर्षा का मुख्य कारण भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाले 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) हैं, न कि बंगाल की खाड़ी के उष्णकटिबंधीय चक्रवात। इस प्रकार के उच्च स्तरीय प्रश्नों के अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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