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BPSC TRE 4.0
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बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता, वर्षा के स्थानिक वितरण और मानसोत्पत्ति की क्रियाविधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवेश सामान्यतः जून के दूसरे सप्ताह में पूर्णिया और भागलपुर के रास्ते होता है, और राज्य में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 85% भाग इसी मानसूनी अवधि (जून से सितंबर) के दौरान प्राप्त होता है।
- 2. बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी शाखा जब बिहार के मैदानी भागों से गुजरती है, तो पूर्वी हिमालयी बाधा और स्थानीय उच्चावच के प्रभाव के कारण राज्य के पूर्वी भागों (किशनगंज, पूर्णिया) से पश्चिमी भागों (रोहतास, कैमूर) की ओर बढ़ने पर वर्षा की मात्रा में सामान्यतः कमी दर्ज की जाती है।
- 3. 'अल-निनो' (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पूर्वी तट पर तापमान में वृद्धि होने से भारतीय उपमहाद्वीप पर वायुदाब की स्थिति मजबूत होती है, जिसके फलस्वरूप बिहार में मानसूनी वर्षा में अप्रत्याशित वृद्धि और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
- 4. बिहार के उत्तर-पश्चिमी तराई क्षेत्रों (पश्चिम चंपारण) में पर्वतीय प्रभाव और स्थानीय तापीय संवहन के कारण दक्षिण-बिहार के मैदानी जिलों की तुलना में औसत वार्षिक वर्षा अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन जून के दूसरे सप्ताह में होता है और राज्य की लगभग 85% वर्षा इसी काल में होती है। बंगाल की खाड़ी की शाखा पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने पर क्रमशः कम वर्षा करती है, तथा तराई क्षेत्रों (जैसे पश्चिम चंपारण और किशनगंज) में भौगोलिक स्थिति के कारण अधिक वर्षा होती है। इसके विपरीत, कथन 3 असत्य है क्योंकि अल-निनो (El Nino) के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप पर वायुदाब कमजोर होता है, जिससे मानसूनी वर्षा पर प्रतिकूल प्रभाव (अवृष्टि या सूखा) पड़ता है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, साहित्यिक कृतियों और पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' केवल राजनीति और शासनकला पर आधारित एक ग्रंथ है, जिसमें मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और कर प्रणाली का विस्तृत विवरण मिलता है, किंतु इसमें आर्थिक और सामाजिक जीवन का कोई उल्लेख नहीं है।
2. विशाखदत्त द्वारा रचित 'मुद्राराक्षस' एक ऐतिहासिक नाटक है, जिससे नंद वंश के पतन और चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा चाणक्य की सहायता से मौर्य साम्राज्य की स्थापना के षड्यंत्रों की जानकारी प्राप्त होती है।
3. बानभट्ट की 'हर्षचरित' संस्कृत गद्य साहित्य का एक उत्कृष्ट ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसमें सम्राट हर्षवर्धन की वंशावली, उनकी विजयों और तत्कालीन सामाजिक-धार्मिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया गया है।
4. संगम साहित्य (जो दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास का प्रमुख स्रोत है) मुख्य रूप से तमिल भाषा में रचित कविताओं का संकलन है, जो चोल, चेर और पांड्य राजवंशों के राजनीतिक इतिहास, व्यापार तथा समाज पर प्रकाश डालता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के प्राचीन इतिहास के संदर्भ में, 'चम्पा' (Champa) महाजनपद की राजधानी थी और इसका उल्लेख बौद्ध एवं जैन ग्रंथों में मिलता है। आधुनिक भूगोल के अनुसार, यह प्राचीन शहर वर्तमान बिहार के किस जिले की सीमा के समीप अवस्थित था?
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