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BPSC TRE 4.0
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बिहार में मानसून के आगमन, वर्षा के स्थानिक वितरण और जलवायु विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जहाँ ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिमी छोर से चलने वाली गर्म स्थानीय हवाओं को 'लू' कहा जाता है, तथा राज्य में मानसूनी वर्षा का मुख्य प्रवेश द्वार बंगाल की खाड़ी की शाखा है।
  2. 2. बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः जून के दूसरे सप्ताह (लगभग 10 से 15 जून के मध्य) तक प्रवेश करता है, तथा राज्य में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ने पर वर्षा की मात्रा में क्रमिक वृद्धि दर्ज की जाती है।
  3. 3. राज्य में प्राप्त होने वाली कुल वर्षा का लगभग 80% से अधिक हिस्सा मानसूनी महीनों (जून से सितंबर) के दौरान प्राप्त होता है, जबकि शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होने वाली हल्की वर्षा रबी की फसल (विशेषकर गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
  4. 4. बिहार के उत्तर-पूर्वी जिलों (जैसे किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) में राज्य में सर्वाधिक वर्षा दर्ज की जाती है, जिसका प्रमुख कारण इन क्षेत्रों का हिमालय की तलहटी के समीप होना और बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा का अत्यधिक सक्रिय होना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि बिहार की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है और बंगाल की खाड़ी की शाखा से यहाँ वर्षा होती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि बिहार में पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ने पर वर्षा की मात्रा में कमी आती है, वृद्धि नहीं होती। कथन 3 सत्य है क्योंकि राज्य की अधिकांश वर्षा (80% से अधिक) दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है और सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा रबी फसलों के लिए लाभप्रद है। कथन 4 सत्य है क्योंकि उत्तर-पूर्वी बिहार (विशेषकर किशनगंज) में हिमालय के सामीप्य और मानसूनी अधिकता के कारण सर्वाधिक वर्षा होती है। इस तरह के महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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