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BPSC TRE 4.0
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और ब्रह्म समाज ने पश्चिमी उदारवाद और तर्कवाद को अपनाते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, जाति व्यवस्था और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया, तथा वेदों की अचूकता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और प्राचीन वैदिक संस्कृति की श्रेष्ठता स्थापित करने का प्रयास किया, किंतु उन्होंने पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए पौराणिक हिंदू धर्म के कर्मकांडों, मूर्तिपूजा और जन्मना जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
- 3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (निम्न जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उन्हें शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय दिलाना था, और इसी वैचारिक पृष्ठभूमि पर उन्होंने 'गुलामगिरी' पुस्तक की रचना की।
- 4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में प्राचीन ग्रंथों से प्रमाण प्रस्तुत करके अथक प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिसे लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में कानूनी मान्यता मिली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (b) है क्योंकि कथन 1 असत्य है। राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज ने वेदों की अचूकता (infallibility of Vedas) में पूर्ण विश्वास व्यक्त नहीं किया था, बल्कि उनका मानना था कि कोई भी ग्रंथ या धर्म त्रुटिहीन नहीं है और उन्होंने तर्क तथा मानवीय विवेक को सर्वोच्च स्थान दिया। इसके विपरीत, दयानंद सरस्वती ने वेदों को अपौरुषेय और अचूक माना था। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। स्वामी दयानंद ने आर्य समाज के माध्यम से रूढ़ियों का खंडन किया, ज्योतिराव फुले ने सत्यशोधक समाज के जरिए शोषितों की आवाज उठाई और 'गुलामगिरी' लिखी, तथा ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ। ऐसे ही अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रश्नों और संपूर्ण पाठ्यक्रम के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद की संरचना (लोकसभा एवं राज्य सभा) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उसके पास भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होता है, साथ ही उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में भाग लेने और बोलने का अधिकार भी प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी मामले में मतदान करने का अधिकार नहीं होता है।
2. अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 निर्धारित की गई है, जिसमें से राज्यों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से अधिकतम 530 सदस्य और संघ राज्य क्षेत्रों से अधिकतम 20 सदस्य चुने जा सकते हैं, तथा राष्ट्रपति द्वारा आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के सदस्यों को मनोनीत करने का प्रावधान 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के द्वारा समाप्त कर दिया गया है।
3. राज्य सभा (संसद का उच्च सदन) एक स्थायी निकाय है और इसका विघटन नहीं होता है, इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, तथा राज्य सभा में संघ राज्य क्षेत्रों (Union Territories) का प्रतिनिधित्व केवल दिल्ली और पुडुचेरी से होता है, अन्य संघ राज्य क्षेत्रों को राज्य सभा में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है।
4. महान्यायवादी को उसके पद से हटाने के लिए संविधान में महाभियोग जैसी किसी कठोर प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है, उसे राष्ट्रपति जब चाहे तब उसके पद से हटा सकते हैं, क्योंकि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णान्धता) का मुख्य कारण क्या है?
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बिहार की नदियाँ, जलवायु एवं कृषि पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जहाँ उत्तर-पश्चिम में स्थित सोमेश्वर और दून की पहाड़ियों के आसपास सर्वाधिक वर्षा होती है, जबकि दक्षिण-मध्य बिहार का क्षेत्र (जैसे गया, औरंगाबाद) वर्षा छाया क्षेत्र और अत्यधिक तापीय तापांतर के कारण शुष्क रहता है।
2. उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ (जैसे कोसी, गंडक, बागमती) हिमालयी नदियाँ होने के कारण सदाबहार हैं और अपने मार्ग परिवर्तन तथा अत्यधिक गाद (Silt) जमा करने के लिए कुख्यात हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ (जैसे सोन, पुनपुन, किउल) प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं और मानसूनी वर्षा पर निर्भर होने के कारण ग्रीष्मकाल में प्रायः सूख जाती हैं।
3. बिहार की कृषि पद्धतियों में 'धान-गेहूं-मक्का' फसल चक्र प्रमुख है, किंतु कृषि रोड मैप (Agriculture Roadmap) के अंतर्गत राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों (जैसे पूर्णिया, कटिहार) में मखाने की वैज्ञानिक खेती और दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्रों (रोहतास, कैमूर) में 'परंपरागत शून्य जुताई' (Zero Tillage) तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
4. बिहार में बाढ़ और सूखे की दोहरी समस्या से निपटने के लिए दक्षिण बिहार की सोन और पुनपुन नदियों को जोड़ने वाली 'सोन-गंगा जल संभरण लिंक नहर परियोजना' सबसे बड़ी सिंचाई योजना है, जिसके तहत उत्तर बिहार की अतिरिक्त बाढ़ के पानी को दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त खेतों तक पहुँचाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विश्व के महाद्वीपों, देशों की सीमाओं और भू-आबद्ध (Landlocked) देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित 'बोलीविया' और 'पराग्वे' दोनों ही पूर्ण रूप से भू-आबद्ध (Landlocked) देश हैं, तथा बोलीविया की राजधानी ला पास (La Paz) विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित प्रशासनिक राजधानी है।
2. अफ्रीका महाद्वीप का 'इथियोपिया' एक भू-आबद्ध देश है जो हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका (Horn of Africa) क्षेत्र का हिस्सा है, और यह अपनी सीमा लाल सागर से साझा करता है।
3. एशिया महाद्वीप का 'कजाकिस्तान' क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा भू-आबद्ध (Landlocked) देश है, जिसकी सीमा पश्चिम में कैस्पियन सागर से लगती है।
4. यूरोप महाद्वीप में स्थित 'स्विट्जरलैंड' और 'ऑस्ट्रिया' दोनों भू-आबद्ध देश हैं, जबकि बाल्कन प्रायद्वीप में स्थित 'सर्बिया' भी समुद्र तट तक सीधी पहुँच नहीं रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर में संतुलित आहार के अंतर्गत विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका और उनके चयापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कार्बोहाइड्रेट और वसा दोनों ही शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले मुख्य पोषक तत्व हैं, किंतु 1 ग्राम वसा के पूर्ण ऑक्सीकरण से उत्पन्न ऊर्जा की मात्रा 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से लगभग दोगुनी होती है।
2. प्रोटीन का मुख्य कार्य शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत और एंजाइमों का संश्लेषण करना है, और शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर ही प्रोटीन ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
3. विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) एक जल-विलेय विटामिन है, जिसका मुख्य कार्य आँखों की दृष्टि को सामान्य रखना और उपकला ऊतकों को स्वस्थ रखना है, तथा इसकी कमी से 'रॉफ्थैल्मिया' (Xerophthalmia) नामक रोग हो जाता है।
4. खनिज लवणों में आयरन (लौह तत्व) हीमोग्लोबिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है, जिसकी कमी से रक्ताल्पता (Anemia) होती है, जबकि आयोडीन थायराइड ग्रंथि द्वारा थायराक्सिन हार्मोन के उत्पादन के लिए अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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