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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, स्वतंत्रताओं और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को उनके पद से केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित और राष्ट्रपति को संबोधित समेकित आवेदन के आधार पर 'कदाचार या असमर्थता' के साबित होने पर ही हटाया जा सकता है, जो कि महाभियोग जैसी प्रक्रिया के समान है।
  2. 2. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) न केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सभी वित्तीय लेन-देन का लेखा-परीक्षण करता है, बल्कि वह सार्वजनिक उपक्रमों के खातों का भी प्रत्यक्ष और पूर्ण लेखा-परीक्षण वैधानिक रूप से स्वयं करता है, जिसमें निजी क्षेत्र के शेयरधारक भी हस्तक्षेप कर सकते हैं।
  3. 3. अनुच्छेद 149 के अनुसार, CAG संघ और राज्यों के लेखाओं से संबंधित अपनी सभी रिपोर्टें राष्ट्रपति और राज्यपालों को सौंपता है, जो उन्हें क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के पटल पर रखवाते हैं, जिसके बाद संसद की 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee) इन रिपोर्टों की गहन जाँच करती है।
  4. 4. उच्चतम न्यायालय की आरंभिक (Original) अधिकारिता के अंतर्गत भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी भी विवाद का निपटारा आता है, बशर्ते यह विवाद किसी राजनीतिक संधि, समझौते या संविधान-पूर्व के किसी कवन से उत्पन्न हुआ हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) में दी गई है, जिसमें संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव और राष्ट्रपति के आदेश की आवश्यकता होती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि CAG सार्वजनिक उपक्रमों के खातों का सीधे लेखा-परीक्षण करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र के ऑडिट मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता बल्कि कुछ मामलों में केवल अनुपूरक ऑडिट करता है। कथन 3 सत्य है, CAG अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) और राज्यपालों (राज्यों के लिए) को सौंपता है जिन्हें सदन के पटल पर रखा जाता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता उन विवादों पर लागू नहीं होती जो किसी ऐसी संधि, समझौते आदि से उत्पन्न होते हैं जो संविधान लागू होने से पहले किए गए थे या जिन पर रोक है। अधिक अभ्यास के लिए हमारी बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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