BaalVikas
Menu
BPSC TRE 4.0
Asked 2 months ago · Viewed 22 times

यूकेरियोटिक कोशिका के विभाजन और कोशिका चक्र के नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोशिका चक्र की 'जी-शून्य' ($G_0$) अवस्था, जिसे शांत अवस्था (Quiescent stage) भी कहा जाता है, में कोशिकाएं चयापचय रूप से निष्क्रिय हो जाती हैं और स्थायी रूप से विभाजित होना बंद कर देती हैं, और वे पुनः कभी भी कोशिका चक्र में प्रवेश नहीं कर सकतीं।
  2. 2. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान 'पैक्टिन अवस्था' (Pachytene stage) में समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थों का आदान-प्रदान होता है जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing Over) कहते हैं, और यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
  3. 3. माइटोसिस (Samasutrib विभाजन) की 'मेटाफेज' (Metapahse) अवस्था में गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर इक्वेटोरियल प्लेट (Equatorial plate) पर व्यवस्थित होते हैं, और इस अवस्था में गुणसूत्रों की आकृति और आकार का सबसे स्पष्ट अध्ययन किया जा सकता है।
  4. 4. कोशिका चक्र के 'चेक पॉइंट्स' (Checkpoints जैसे $G_1/S$ और $G_2/M$) पर चक्र की प्रगति को नियंत्रित करने के लिए 'साइक्लिन' (Cyclins) और 'साइक्लिन-डिपेंडेंट किनेसेस' (CDKs) नामक प्रोटीन परिसरों की मुख्य भूमिका होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि $G_0$ (जी-शून्य) अवस्था में कोशिकाएं चयापचय रूप से सक्रिय होती हैं, लेकिन जीव की आवश्यकता के अनुसार वे इस अवस्था से निकलकर पुनः कोशिका चक्र में प्रवेश कर सकती हैं (स्थायी रूप से विभाजित होना बंद नहीं करतीं)। अन्य सभी कथन (2, 3 और 4) पूर्णतः सत्य हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Share:
अगला प्रश्न → मौर्य साम्राज्य और मौयोट्तर काल (शंग, कान्व, सातवाहन और कुषाण वंश) के… ← पिछला प्रश्न सत्रहवीं शताब्दी के दौरान भारत में यूरोपीय वाणिज्यिक…

Related Questions

→ 19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया तथा वेदों की अचूकता और सर्वोच्चता को बिना किसी शर्त के स्वीकार किया था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने 'आर्य समाज' की स्थापना 1875 में की थी, जिनका मुख्य नारा 'वेदों की ओर लौटो' था, और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराकर पौराणिक मान्यताओं और जाति-प्रथा की कठोरता का खंडन किया था। 3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (बहुजन समाज) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा शिक्षा के माध्यम से उन्हें आत्म-सम्मान दिलाना था। 4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1856 में 'हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसे लॉर्ड डलहौजी के शासनकाल में कानूनी रूप से मान्यता मिली थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1813 के चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1813) द्वारा ब्रिटिश संसद ने भारत में साहित्य के पुनरुत्थान, विद्वान भारतीयों के प्रोत्साहन और विज्ञान के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये की धनराशि खर्च करने का प्रावधान किया था। 2. 'हंटर शिक्षा आयोग' (Hunter Commission, 1882), जिसे विलियम हंटर की अध्यक्षता में नियुक्त किया गया था, का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करना था, और इसने विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा के नियंत्रण को स्थानीय निकायों (Municipalities and District Boards) को सौंपने की संस्तुति की थी। 3. 'रैले आयोग' (Raleigh Commission, 1902) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1904 में 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम' (Indian Universities Act) पारित किया गया, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा कर दिया गया और सीनेट के सदस्यों की संख्या सीमित कर दी गई। 4. वर्ष 1917 में गठित 'सैडलर विश्वविद्यालय आयोग' (Sadler University Commission), जिसे कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग भी कहा जाता है, ने माध्यमिक शिक्षा के सुधार के लिए 12-वर्षीय स्कूली शिक्षा की प्रणाली का प्रस्ताव दिया और विश्वविद्यालयों में 'सम्मान' (Honours) पाठ्यक्रमों की शुरुआत की संस्तुति की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप, उसके कारणों और विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वी.डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस विद्रोह को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' न कहकर सुनियोजित प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में वर्णित किया था, जबकि इतिहासकार आर.सी. मजुमदार ने इसे न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम माना था। 2. बिहार के जगदीशपुर में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था, और उन्होंने ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग की नीतियों के विरोध में इस आंदोलन की रूपरेखा पटना में ही तैयार की थी। 3. अवध (लखनऊ) में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हज़रत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिश कादिर को नवाब घोषित करके किया था, और ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी लॉरेंस तथा आउट्राम के विरुद्ध यहाँ की स्थानीय जनता और तात्या टोपे ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया था। 4. झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के तहत उनके दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी न माने जाने के कारण अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठाया था, और ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध guerilla युद्ध का सफल संचालन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और इसके विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को जोड़ा गया था। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है, जबकि इसके ठीक विपरीत 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का भाग मानने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। 3. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से लिया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है। 4. यद्यपि भारतीय संविधान की प्रस्तावना न्यायलय में न्यायोचित (Justiciable) नहीं है अर्थात् इसके प्रावधानों को अदालतों द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता है, तथापि यह संविधान की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है? → सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.